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दिमाग की सीमा 150 दोस्त
ऑरकुट और फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किग साइट्स पर भले ही आपके हजारों दोस्त जुड़ते जाएं, लेकिन एक अध्ययन में दावा किया गया है कि इंसान का दिमाग एक बार में केवल 150 दोस्तों को ही संभाल सकता है। यह अनोखा अध्ययन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि भले ही लोकप्रिय सोशल नेटवर्किग साइट्स पर लोगों के ज्यादा से ज्यादा दोस्त बन जाएं, लेकिन लोगों के सार्थक दोस्तों की तादाद डेढ़ सौ से ज्यादा नहीं होती।

मुख्य अध्ययनकर्ता रॉबिन डनबर ने 90 के दशक में डनबर्स नंबर नामक एक सिद्धांत विकसित किया था। इस सिद्धांत में दावा किया गया है कि हमारे दिमाग का नियोकॉर्टेक्स हमें महज 150 दोस्तों को याद रखने की इजाजत देता है। नियोकॉर्टेक्स का इस्तेमाल सचेत विचार और भाषा के लिए किया जाता है। डनबर ने अध्ययन के दौरान विभिन्न सामाजिक समूहों का अध्ययन किया। इनमें गांवों से लेकर आधुनिक कार्यालयों के समूह शामिल थे।

लड़कियां आगे

"टेलीग्राफ" में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार इसमें पता चला कि जैसे-जैसे समूहों में लोगों की संख्या बढ़नी शुरू हो जाती है, वे खुद को 150 के समूह में रखना शुरू कर देते हैं और उसमें सहज महसूस करते हैं। शोधकर्ता अब यह जानना चाहते हैं कि क्या सोशल नेटवर्किग साइट्स ने सामाजिक समूहों का आकार बढ़ाया है? शुरूआती परिणामों में पता चला है कि ऎसा नहीं हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि ऎसी साइट्स पर आपके डेढ़ हजार दोस्त हो सकते हैं, लेकिन आप महज डेढ़ सौ दोस्तों के साथ ही संपर्क में रह सकते हैं। संपर्क कायम रखने में भी लड़कों और लड़कियों की संख्या में काफी अंतर है। लड़कियां, लड़कों के मुकाबले ज्यादा संपर्क रखती हैं और ऑनलाइन दुनिया में भी ज्यादा सामाजिक होती हैं।
 
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