बंगलौर में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों के नारों के बीच केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा है कि आनुवांशिक रूप से संवर्धित बीटी बैंगन के व्यावसायिक इस्तेमाल पर चल रहे विचार-विमर्श का सिलसिला ख़त्म हो गया है और वे जनता के हित में दस फ़रवरी को इस पर अंतिम फ़ैसला सुनाएँगे.
ग़ौरतलब है कि इस विषय पर पूरे देश में विवाद छिड़ा हुआ है और कई राज्य सरकारों ने भी मुखर होकर बीटी बैंगन उगाए जाने को अनुमति देने पर आपत्ति जताई है. उत्तराखंड ने राज्य में बीटी बैंगन उगाने पर प्रतिबंध लगा दिया है जबकि तमिलनाडु की ओर से प्रशासन ने ऐसी ही आपत्ति जताई है.
विचार-विमर्श के सिलसिले के अंतिम दौर में शनिवार को बंगलौर पहुँचे जयराम रमेश को किसानों, ग़ैर-सरकारी संगठनों और कई अन्य संस्थाओं के लोगों के प्रदर्शन और शोर का सामना करना पड़ा.
प्रदर्शनकारियों ने बैनर उठा रखे थे जिनपर लिखा था - 'वी डोंट नीड बीटी ब्रिजल' यानी हम आनुवांशिक रूप से संवर्धित बीटी बैंगन नहीं चाहते.
गुस्सा हो गए जयराम
शोर के बीच पर्यावरण मंत्री ये कहते सुने गए - "आप मेरी बात सुनें...हमारे सामने एक गंभीर मुद्दा आया हुआ है." लेकिन बीटी बैंगन का विरोध कर रहे लोगों पर कोई ख़ास असर नहीं हुआ.
इस शोर-शराबे के बीच एक प्रदर्शनकारी की टिप्पणी पर जयराम रमेश ख़ासे गुस्सा हो गए और कह बैठे - "आपको मानसिक चिकत्सा की ज़रूरत है." इस पर नाराज़ हुए प्रदर्शनकारी ने कहा, "मैं आपको ठीक यही सलाह देना चाहता हूँ."
लेकिन बाद में इस गुस्से के बारे में पूछे जाने पर रमेश ने मीडिया को बताया, "मैं चार घंटे तक बातचीत करता रहा और केवल दो मिनट के लिए गुस्सा हुआ था.....क्योंक मुझपर मॉनसैंटो कंपनी का एजंट होने का आरोप लगाया गया."
उनका कहना था, "जनता, वैज्ञानिकों और संस्थाओं के साथ विचार-विमर्श पूरा हो गया है. मैं दस फ़रवरी को अंतिम फ़ैसले की घोषणा करुँगा. इसमें न तो ग़ैर-सरकारी संगठनों, न वैज्ञानिकों और न राजनीतिज्ञों की बात का बोलबाला होगा. पूरी जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण मंत्री के तौर पर मैं अपना फ़ैसला दूँगा."
महत्वपूर्ण है कि कर्नाटक की राजधानी बंगलौर में जहाँ एक ओर बीटी बैंगन के विरोधियों ने प्रदर्शन किया वहीं किसानों का एक वर्ग ऐसा भी था जिसने बीटी बैंगन के पक्ष में अपनी बात रखी.