नई दिल्ली, केंद्रीय स्तर पर ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर रामलीला मैदान में हुई महारैली में जाटों ने सरकार को अपनी ताकत का बखूबी अहसास करा दिया। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले हुई महारैली ने इस बात का भी अहसास करा दिया कि सरकार नहीं चेती तो यहां भी राजस्थान जैसे हालात हो सकते हैं। रैली के माध्यम से संकेत दिए गए हैं, कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो दिल्ली का बिजली-पानी बंद कर देंगे और साथ ही राष्ट्रमंडल खेल भी नहीं होने देंगे। समिति का कहना है कि यह उनकी रणनीति का हिस्सा है।
रामलीला मैदान में आयोजित महारैली में जाट समुदाय ने स्पष्ट संकेत दे दिए कि केंद्र सरकार नहीं जागी तो हालात बिगड़ेंगे। इस रैली में मुख्यत: नौ प्रदेशों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे। मगर यूपी और हरियाणा के कार्यकर्ताओं की संख्या अच्छी खासी रही। महारैली में उत्तार प्रदेश, हरियाणा,राजस्थान, उत्ताराखंड, पंजाब, मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात के अलावा अन्य प्रांतों के लोग पहुंचे।
समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने अपने संबोधन में कहा कि वह किसी राजनीतिक पार्टी की निंदा नहीं करते, मगर उनका एक ही लक्ष्य है कि जाटों को न्याय मिले। और वह इसे लेकर रहेंगे। कार्यक्रम स्थल पर जलाई गई जाट मशाल की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि यह मशाल तब तक जलती रहेगी और आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक जाटों को केंद्र सरकार से आरक्षण नहीं मिल जाता।
इस मौके पर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री हुकुम सिंह, समिति के महासचिव राजेंद्र सिंह चिंकारा, एमआर तेवतिया व पुष्पेंद्र सिंह के अलावा पंजाब से करनैल सिंह, अमन सिंह, मास्टर बाबूराम तोमर, जयकरण चौधरी, अशोक चौधरी आदि मौजूद थे। समिति के राष्ट्रीय महासचिव एमआर तेवतिया ने बताया रैली में पचास हजार के करीब लोग शामिल हुए। उधर पुलिस ने रैली में शामिल होने वालों की संख्या 15 हजार के करीब आंकी है।