बर्लिन। अगर बचपन में ही बच्चा एकजिमा (खाज) से पीडित होता हैं तो भविष्य में उसके बर्ताव और मानसिक सेहत पर नकारात्मक असर पड़ता है। यह बात वैज्ञानिकों ने हाल में किए गए एक शोध में कही गई है।
वैज्ञानिकों ने यह शोध 1995 से 1998 के बीच पैदा हुए 5991 बच्चों पर किया। शोध दल के प्रमुख ड्रेस्डेन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में सहायक प्रोफेसर जोकेन स्कहमिट और उनके सहयोगियों ने अपने शोध में पाया कि जिन बच्चों को जिंदगी के पहले दो सालों में एकजिमा होता है तो भविष्य में उन्हें उन बच्चों के मुकाबले मनोवैज्ञानिक असामान्यताओं से ग्रसित होने का डर रहता है, जिन्हें एकजिमा नहीं होता।
शोध दल में शामिल डॉक्टर जोआखिम हेनरिच ने बताया कि इससे पता चलता है कि आगे चलकर बच्चों को एकजिमा के कारण मनोवैज्ञानिक दिक्कतें आने के साथ उनके बर्ताव पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि जिन बच्चों को दो साल तक एकजिमा रहता है उनकी मानसिक सेहत पर उन बच्चों के मुकाबले ज्यादा नकारात्मक असर पड़ता है जिन्हें सिर्फ बालपन में ही एकजिमा हुआ हो।
वैज्ञानिकों ने एकजिमा से ग्रसित बच्चों के पारिवारिक इतिहास, दस साल की उम्र में उनकी शारीरिक सेहत एवं भावनात्क स्थिति का डाटा और उनकी जिंदगी के बारे में सूचना इकटा करने के बाद उनसे सवाल पूछे।
क्या है एकजिमा
एकजिमा गैर फैलने वाली बीमारी त्वचा की बीमारी है, जिसकी वजह से इससे ग्रसित व्यक्ति को काफी खुजली आती है। बच्चाें और किशोरों में होने वाली सबसे सामान्य त्वचा की बीमारी है।