वाशिंगटन। अगर आप पहली बार में वाहन चलाने की परीक्षा पास नहीं कर पाते हैं, तो परेशान मत होइए। एक दृष्टि से यह अच्छा ही है, आप दूसरी बार इसे जरूर पास कर लें। यह आपके लिए फायदेमंद रहेगा।
इसे पढ़ने के बाद आपके मन में जरूर यह सवाल उठ सकता है कि पहली बार में अगर टेस्ट पास कर लें तो क्या फर्क पड़ेगा। चलिए आपके इस सवाल का जवाब हम देते हैं। वैज्ञानिकों ने हाल ही किए एक अध्ययन में कहा है कि जो वाहन चालक दूसरी बार में वाहन चलाने का टेस्ट पास करते हैं वे सड़कों पर सबसे सुरक्षित तरीके से गाड़ी चलाते हैं।
नहीं करना पड़ता परेशानियों का सामना
वैज्ञानिकों का यह भी मानना हैं कि दूसरी बार में पास होने वाले चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस के बारे में ना के बराबर कोई टिप्पणी दर्ज की जाती है, सड़कों पर शायद ही उनका कभी किसी से झगड़ा होता होगा और यही नहीं, पुलिस भी उन्हें ज्यादा परेशान नहीं करती।
होते हैं खराब चालक
वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन लोगों ने वाहन चलाने का टेस्ट दो से ज्यादा बारी में पास किया, वे खराब चालक साबित होते हैं। जिन चालकों ने अपना टेस्ट चार, पांच या छह कोशिशों में पास किया, उनका गाड़ी चलाने का रिकॉर्ड बहुत खराब होता है। ऎसे चालक सिग्नल ज्यादा तोड़ते हैं, एक तरफा रास्ते में घुस जाते हैं और दूसरे चालकों के मुकाबले गति सीमा से अधिक तेज चलाने के आरोप में पुलिस उन्हें ज्यादा रोकती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार यही नहीं, ऎसे चालक अपने वाहनों को नो-पार्किग में भी खड़ा कर देते हैं, जिसके चलते उन्हें इसके लिए जुर्माना देना पड़ता है। साथ ही दूसरों के मुकाबले ज्यादा बार बीमा पर दावा करते हैं और गाड़ी खड़ी करते वक्त स्थिर वस्तुओं को टक्कर मार देते हैं।
होते हैं बेहतर चालक
ऎसे मामले को लेकर 6200 चालकों पर अध्ययन करने वाली कम्पनी "कांटीनेटल टायर्स" के निदेशक गाय फ्रॉबीशर ने कहा कि इससे पता चलता है कि दूसरी बार चालन टेस्ट पास करने वाले लोग सबसे बेहतर चालक होते हैं।