जयपुर। अगले दो-तीन सप्ताह में गर्मी दस्तक देने वाली है। गर्मी के साथ यूं तो छोटी-मोटी बहुत सी परेशानियां आती हैं, पर सबसे ज्यादा समस्या अगर किसी चीज की होती है तो वह है पानी। पानी की कमी से होने वाली विभिन्न समस्याओं से बचने के लिए पिंकसिटी वुमन ने अभी से वाटर मैनेजमेंट पर सोचना शुरू कर दिया है। क्योंकि उनका मानना है कि बाद में पानी के लिए तरसने से तो अच्छा है कि अभी से ही इस तरह पानी का प्रयोग किया जाए कि पानी को सहेजने की आदत विकसित हो सके। जस्ट जयपुर ने बात की कुछ लेडीज से और जाना उनके वाटर मैनेजमेंट के बारे में।
ठीक करवा लिए लीकेज
गर्मी का मौसम आते ही सबसे बड़ी समस्या पानी की होने लगती है, ऎसे में यह हमारी जिम्मेदारी है कि अभी से ही वाटर सेविंग पर सोचना शुरू कर दें। यह कहना है निर्माण नगर में रहने वाली मीना चौहान का। वे बताती हैं कि मैंने घर के सभी नल व लीकेज प्वॉइंट ठीक करवा लिए हैं। इससे बेवजह वेस्ट होने वाला पानी बचेगा, जिससे फ्यूचर में दिक्कत नहीं होगी। इसके अलावा यह भी ध्यान रखती हूं कि नल बेवजह न चले, जितनी जरूरत हो उतना ही चलाया जाए।
सेविंग भी गार्डन भी
मैं किचन में काम आने वाले पानी को पौधों में डालती हूं, जिससे गार्डन भी ग्रीन रहे और पानी भी सेव रहे। यह कहना है जूही मानसिंघानी का। वे बताती हैें कि न केवल गर्मियों के लिए, बल्कि हर मौसम में ही किचन के पानी को फिर से यूज कर लेती हूं। सुबह-शाम पीने का पानी भरने के दौरान मटके में बचा पानी बाथरूम में यूज कर लेना भी पानी बचाने की दिशा में सही आदत है।
बच्चों को गाइड करना जरूरी
छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने के साथ यह भी जरूरी है कि बच्चों को भी प्रॉपर गाइड किया जाए। यह कहना है जवाहर नगर निवासी शालिनी अग्रवाल का। वे बताती हैं कि मेरे बच्चे छोटे हैं, ऎसे में वह कई बार बेवजह पानी बर्बाद करते हैं। इसलिए मैं स्वयं पानी का सही उपयोग करने के साथ-साथ उन्हें भी पानी का सही इस्तेमाल करना सिखाती हूं। अभी तो पानी की कमी नहीं है, पर गर्मी में समस्या हो सकती है। ऎसे में बच्चों की यह आदत काफी फायदेमंद रहेगी।
ऎसे होती है बचत
सब्जियों व फलों को नल के नीचे धोने की बजाय किसी बर्तन में धोना।
दालों, सब्जियों व फलों के पानी को पौधों में डालना।
एक साथ कपड़े एकत्रित करके वॉशिंग मशीन चलाना।
वॉशिंग मशीन में बचे सर्फ के पानी से गाडियां धोना।
कुकिंग के लिए माइक्रोवेव और कुकर का इस्तेमाल करना।
बर्तनों को नल के नीचे ना धोकर बर्तन में पानी लेकर धोना।
नहाते समय शॉवर का यूज कम से कम करना।
गमलों को क्यारियों में रखकर पानी देना, ताकि एक्स्ट्रा पानी क्यारियों में चला जाए।
गार्डन में सीजन के हिसाब से ऎसे प्लांट्स लगवाना, जिनमें कम पानी लगता हो।
बर्तन धोने के लिए लिक्विड डिशवॉशर यूज करना, ताकि पानी कम लगे।
वाटर फिल्टर से बचे पानी का री-यूज करना।
नील लगाने के बाद बचे पानी का पोछे के लिए यूज करना।
गाडियां धोने के लिए पाइप के बजाय बाल्टी का यूज करना।
दिन के बजाय पौधों में शाम के समय पानी देना।
बार-बार बोरिंग चलाने की बजाय रात के समय पूरा पानी भर लेना।