नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस यानि 8 मार्च का दिन इस बार महिलाओं के लिए खास सौगात लेकर आ सकता है। केन्द्र में सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की मुखिया सोनिया गांधी ने आज संकेत दिए हैं कि महिला आरक्षण बिल को संसद में आठ मार्च को पेश किया जा सकता है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार महंगाई पर बुलाई गई सीपीपी की बैठक में सोनिया गांधी ने स्पष्ट किया है कि महिला आरक्षण बिल को पारित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। इसके साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष ने खाद्य सुरक्षा बिल को भी संसद में पेश करने के संकेत दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि संसद में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण से संबंधित महिला आरक्षण विधेयक पिछले 13 साल से अटका पड़ा है। 1996 में महिला आरक्षण विधेयक को एच. डी. देवेगौड़ा सरकार ने पहली बार संसद में पेश किया था। महिला आरक्षण विधेयक 2008 के मौजूदा स्वरूप को कांग्रेस, भाजपा और वामदलों का समर्थन प्राप्त है, लेकिन समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल यूनाईटेड इस विधेयक के विरोध में हैं।
यादव तिकड़ी यानि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह, राजद अध्यक्ष लालू यादव और जदयू अध्यक्ष शरद यादव महिला आरक्षण बिल में कोटे के अंदर कोटे की मांग कर रहे हैं। इनका कहना है कि महिला आरक्षण बिल में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं को अलग से आरक्षण दिया जाना चाहिए। संसद में किसी बिल को मतदान के जरिए पारित करवाने के लिए संसद के कुल सांसदों का दो तिहाई बहुमत जरूरी है। यदि संसद में सभी सांसद मौजूद न हों तो विधेयक को वहां उपस्थित सांसदों में से 50 फीसदी सांसदों का समर्थन जरूरी है।