नई दिल्ली। राज्यसभा में आज मचे हंगामे के बाद महिला आरक्षण बिल पारित न हो पाने को लेकर भाजपा ने जहां इसके लिए कांग्रेस की नीयत पर अंगुली उठाई है। हालांकि सरकार के मंगलवार को चर्चा कराने के वादे को देखते हुए पार्टी ने अपने सांसदों फिर व्हिप जारी किया है। बिल को लेकर कांग्रेस का समर्थन कर रही प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा तथा वामपंथियों को सरकार की सदन में अपनाई गई रणनीति रास नहीं आई। दोनों पार्टियों ने सरकार को कटघरे में लाते हुए कहा है कि सरकार चाहती तो आज ही बिल पास हो सकता था। सदन में हंगामा मचाने वालों को बाहर निकाल कर भी चर्चा कराई जा सकती थी, जबकि ऎसा नहीं किया गया।
भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल को लेकर कांग्रेस की नीयत साफ नहीं दिख रही। सरकार के कदम से लग रहा है कि वह बिल लाने की इच्छुक नहीं है। हम चाहते थे कि आज ही चर्चा हो इसके बाद वोटिंग हो जाए। लगता है कि फिलहाल यह बिल टल गया है। उन्होंने बिल का विरोध कर रही पार्टियों को भी इसके लिए जिम्मेदार बताया।
वादे से पीछे हट रही सरकार
राज्य सभा मे विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने इस विधेयक को लेकर सदन में दिन भर हुए शर्मनाक हंगामे और तोड़फोड़ के बाद कहा कि विधेयक को बिना चर्चा के पारित कराने की कोशिश से सरकार की मंशा पर शक होने लगा है। उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक को बिना चर्चा के पारित कराना सभंव ही नहीं है। उन्होंने संसद परिसर में पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा कि सरकार के रवैये से लग रहा है कि उसके पांव कांप रहे थे और वह अपने वादे से पीछे हट रही है।
गौरतलब है कि राज्यसभा में विधेयक पर सोमवार शाम छह बजे मतदान होना था और भाजपा व वामदलों के विधेयक को समर्थन देने की घोषणा करने से सरकार आश्वस्त थी कि विधेयक पारित हो जाएगा पर इन दोनों दलों ने भी पलटी खाते हुए सरकार पर पहले चर्चा कराने का दवाब डाला। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी विभिन्न दलों के नेताओं ने मिलकर विधेयक पर चर्चा कराने की मांग की।