नई दिल्ली। भारत अफगानिस्तान में अपने नागरिकों पर आतंककारी हमले होने के मद्देनजर वहां चल रहे अपने मिशन की गतिविधियों में कमी लाने के विकल्प पर गौर कर रहा है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक सरकार अफगानिस्तान में ऊर्जा और सड़क निर्माण जैसे प्रोजेक्ट में काम कर रहे सभी भारतीयों को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कराने के लिए एक जगह पर रखने की योजना बना रही है।
बीती 26 फरवरी को काबुल में एक आतंकी हमले में नौ भारतीयों की मौत हो गई थी। उसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने वहां की यात्रा की थी। मेनन के आकलन के बाद ही सरकार की यह योजना सामने आई है।
काबुल दूतावास के अलावा हेरात, कंधार, मजार ए शरीफ और जलालाबाद के दूतावास में भी भारत के दूतावास हैं। सूत्रों ने कहा एक एडवाइजरी जारी कर अफगानिस्तान में रह रहे सभी भारतीयों को स्वदेश लौटने को कहा जा सकता है। उल्लेखनीय है कि काबुल में भारतीय मेडिकल मिशन पहले ही रोक दिया गया है। हाल में हुए हमले से पहले तालिबान आतंककारी पहले भी दो बार भारतीय दूतावास को निशाना बना चुके हैं। सात जुलाई 2007 और 8 अक्टूबर 2008 को यह हमले हुए थे जिसमें कुछ भारतीयों की मौत हुई थी।