पश्चिम एशिया संघर्ष को सुलझाने के मकसद से पाकिस्तान में हुई ऐतिहासिक वार्ता के दौरान अमेरिका ईरान का विश्वास जीतने में “विफल” रहा, ये बात ईरान के शीर्ष वार्ताकार ने रविवार को कही है।
आपको बता दें, पाकिस्तान में अमेरिका के साथ लंबी शांति वार्ता में ईरान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने दोनों पक्षों के बीच समझौता न हो पाने के बाद ये टिप्पणी की है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘X’ पर की गई पोस्ट में गालिबाफ ने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने “भविष्य की दिशा में कई पहल कीं, लेकिन इस दौर की वार्ता में दूसरा पक्ष अंततः ईरानी प्रतिनिधिमंडल का विश्वास जीतने में विफल रहा।” गालिबाफ ने कहा, “वार्ता से पहले मैंने इस बात पर जोर दिया था कि हमारे पास आवश्यक सद्भावना और दृढ़ संकल्प है, लेकिन पिछले दो युद्धों के अनुभवों के कारण हमें दूसरे पक्ष पर भरोसा नहीं है।”
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मोहम्मद बाकिर ने आगे कहा, “अमेरिका ने हमारे तर्क और सिद्धांतों को समझ लिया है और अब उसके पास ये तय करने का समय है कि वो हमारा विश्वास जीत सकता है या नहीं?” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईरान अपने लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए सैन्य बल के साथ-साथ सशक्त कूटनीति का भी सहारा लेता है।
उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि ईरानी जनता के अधिकारों की प्राप्ति के लिए सैन्य संघर्ष के साथ-साथ कूटनीति भी एक अन्य दृष्टिकोण है, और हम ईरानियों द्वारा चालीस दिनों में हासिल की गई राष्ट्रीय रक्षा की उपलब्धियों को सुदृढ़ करने के अपने प्रयासों को एक पल के लिए भी नहीं रोकेंगे।”
इसके साथ ही उन्होंने शांति वार्ता में सहयोग देने के लिए पाकिस्तान का आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने वार्ताकारों का समर्थन करने के लिए “ईरान की वीर जनता” की प्रशंसा की और पाकिस्तान में हुई लंबी वार्ता के दौरान अपनी टीम के अथक प्रयासों की सराहना की।
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अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि वार्ता में शांति समझौता नहीं हो सका, जिसका मुख्य कारण तेहरान द्वारा अपने परमाणु कार्यक्रम को न छोड़ना था। वेंस ने अमेरिका रवाना होने से पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हम यहां से एक बहुत ही सरल प्रस्ताव लेकर जा रहे हैं, एक ऐसा तरीका जिससे ये स्पष्ट हो जाए कि ये हमारा अंतिम और सर्वोत्तम प्रस्ताव है। हम देखेंगे कि ईरानी इसे स्वीकार करते हैं या नहीं।”
गौरतलब है, दोनों पक्षों की ओर से छह दिवसीय युद्धविराम की घोषणा के चार दिन बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई वार्ता शनिवार को हुई थी। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान और अमेरिका के बीच ये पहली प्रत्यक्ष, उच्च स्तरीय बातचीत थी।
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