हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केवल स्कूल शिक्षा विभाग के लिए ही 18 हजार 717 करोड़ 89 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है, जो राज्य के कुल बजट 2 लाख 23 हजार 658 करोड़ 17 लाख रुपये का लगभग 8.37 प्रतिशत है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सदन में बजट पर चर्चा के दौरान भूपेंद्र सिंह हुड्डा और आफताब अहमद द्वारा उठाए गए प्रश्न पर जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार शिक्षा पर जी.डी.पी. का लगभग 6 प्रतिशत व्यय होना चाहिए। जबकि, राज्य के बजट में यह लगभग 1.9 प्रतिशत बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा पर जी.डी.पी. के 6 प्रतिशत खर्च का लक्ष्य कोई नया प्रावधान नहीं है। यह लक्ष्य सर्वप्रथम कोठारी आयोग की सिफारिशों के आधार पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1968 में रखा गया था। बाद में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 तथा 1992 की समीक्षा में भी इसे दोहराया गया।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के भाग-प्ट की मद 26.1 और 26.2 में भी यह स्पष्ट किया गया है कि शिक्षा में निवेश बढ़ाकर जी.डी.पी. के 6 प्रतिशत तक पहुंचने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर प्रयास करेंगी। यह लक्ष्य केवल किसी एक राज्य का नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए संयुक्त रूप से केंद्र और राज्यों के कुल सार्वजनिक व्यय का लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि यदि इसे जी.एस.डी.पी. के प्रतिशत में देखा जाए, तो यह 1.37 प्रतिशत बनता है। लेकिन, शिक्षा बजट में केवल स्कूल शिक्षा विभाग ही नहीं, बल्कि उच्चतर शिक्षा तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग का बजट भी शामिल किया जाता है। जब इन सभी मदों को सम्मिलित किया जाता है, तब शिक्षा पर कुल व्यय की वास्तविक स्थिति सामने आती है। इन्हें मिलाकर यह जी.एस. डी.पी. का 1.67 प्रतिशत तथा राज्य के कुल बजट का 10.25 प्रतिशत बनता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा को भविष्य के निर्माण का सबसे बड़ा साधन मानती है। पिछले वर्षों में प्रदेश में विद्यालयों के बुनियादी ढांचे का सुदृढीकरण, डिजिटल शिक्षा का विस्तार, नए कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों की स्थापना तथा शिक्षकों की भर्ती और प्रशिक्षण जैसे अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इसलिए विपक्ष शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर भ्रम फैलाने का प्रयास न करें।
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