Pushkar Singh Dhami : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय, सुद्धोवाला (प्रेमनगर, देहरादून) में आयोजित ‘शी फॉर स्टेम उत्तराखण्ड’ विषयक कार्यशाला में प्रतिभाग किया।मुख्यमंत्री धामी ने ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस’ के अवसर पर सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं तथा कार्यशाला में उपस्थित सभी महानुभावों का अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने ‘शी फॉर स्टेम’ विशिष्ट कार्यक्रम के माध्यम प्रदेश की 20 प्रतिभाशाली बेटियों को 50-50 हजार रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की।मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की कि शी फॉर स्टेम के तहत हर जनपद में पांच छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी |
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इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि स्टेम हेतु स्टार्टअप आरंभ करने के लिए में छात्राओं को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे | महिला प्रौद्योगिकी केंद्रों में स्वयं सहायता समूहो को जोड़ा जाएगा |मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस कार्यक्रम के माध्यम से होनहार बेटियों को STEM अर्थात साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स के क्षेत्रों में शिक्षा एवं करियर के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही दूरस्थ एवं सीमांत क्षेत्रों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देने तथा महिलाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं।Pushkar Singh Dhami
मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए इन-मोबी, विज्ञानशाला इंटरनेशनल, यूकॉस्ट तथा उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय सहित सभी आयोजकों को साधुवाद देते हुए कहा कि उन्होंने इस दूरदर्शी पहल को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारतीय इतिहास साक्षी है कि नारीशक्ति केवल सामाजिक या पारिवारिक जीवन तक सीमित नहीं रही, बल्कि विज्ञान, दर्शन, खगोलशास्त्र एवं चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में भी अग्रणी रही है।Pushkar Singh Dhami
वैदिक काल में गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषियाँ दार्शनिक विमर्श में अग्रणी थीं, जबकि लीलावती ने गणित के क्षेत्र में विश्व को दिशा प्रदान की। उन्होंने उल्लेख किया कि चरक-संहिता और सुश्रुत-संहिता जैसे आयुर्वेदिक ग्रंथों के विकास में भी स्त्रियों के योगदान के प्रमाण मिलते हैं।Pushkar Singh Dhami Pushkar Singh DhamiPushkar Singh Dhami
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मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक काल में भी अनेक महिलाओं ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में असाधारण योगदान देकर देश का गौरव बढ़ाया है। स्वतंत्रता से पूर्व के समय में, जब महिलाओं के लिए घर से बाहर निकलना भी चुनौतीपूर्ण था, अन्ना मणि ने भारत की पहली महिला मौसम वैज्ञानिक बनकर इतिहास रचा और ‘वेदर वुमन ऑफ इंडिया’ के रूप में प्रसिद्ध हुईं। उन्होंने मौसम विज्ञान और वैज्ञानिक उपकरणों के विकास में अमूल्य योगदान दिया। इसी प्रकार कमला सोहोनी विज्ञान के क्षेत्र में पीएचडी प्राप्त करने वाली भारत की पहली महिला बनीं और यह सिद्ध किया कि प्रतिभा किसी बंधन की मोहताज नहीं होती।
