Mahashivratri 2026: आज 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि है और यह भगवान शिव की पूजा और आत्म-संयम का एक विशेष दिन है। यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है, जो इस साल 15 फरवरी की शाम से शुरू होकर 16 फरवरी की सुबह तक रहेगी। इसलिए शिव भक्तों ने आज ही उपवास किया है… महाशिवरात्रि का यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रतीक है।
महाशिवरात्रि का महत्व
महाशिवरात्रि का महत्व भगवान शिव की पूजा और आत्म-संयम में है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रतीक है और इस दिन भक्त भगवान शिव की पूजा करके अपने पापों से मुक्ति पाते हैं और मोक्ष प्राप्त करते हैं। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि, और शांति आती है।
महाशिवरात्रि 2026 पूजा विधि
महाशिवरात्रि के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करते और स्वच्छ वस्त्र धारण करते। इसके बाद, भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें या शिव मंदिर में जाकर पूजा शुरू करें… जैसे-
जल अभिषेक: शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। जल अभिषेक करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति के पापों का नाश होता है।
पंचामृत अभिषेक: दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर से शिवलिंग का अभिषेक करें। पंचामृत अभिषेक करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि, और शांति आती है।
बेलपत्र और धतूरा: शिवलिंग पर बेलपत्र और धतूरा चढ़ाएं। बेलपत्र और धतूरा भगवान शिव को प्रिय हैं, और इनको चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
फूल और फल: शिवलिंग पर फूल और फल चढ़ाएं। फूल और फल भगवान शिव को प्रिय हैं, और इनको चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
दीपक और धूप: दीपक और धूप जलाएं। दीपक और धूप भगवान शिव को प्रिय हैं, और इनको जलाने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
मंत्र जाप: “साम्य सदा शिव” मंत्र का जाप करें। मंत्र जाप करने से भगवान शिव और माता पार्वती दोनों की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति के पापों का नाश होता है।
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महाशिवरात्रि के चार प्रहर का समय
महाशिवरात्रि की रात को चार प्रहरों में बांटकर पूजा करने की परंपरा है। इस वर्ष चारों प्रहरों का समय इस प्रकार रहेगा:
– प्रथम प्रहर: शाम 6:01 बजे से रात 9:09 बजे तक
– द्वितीय प्रहर: रात 9:09 बजे से 16 फरवरी 2026 को 12:17 बजे तक
– तृतीय प्रहर: 16 फरवरी 2026 को रात 12:17 बजे से सुबह 3:25 बजे तक
– चतुर्थ प्रहर: 16 फरवरी 2026 को सुबह 3:25 बजे से प्रातः 6:33 बजे तक
निशीथ काल पूजा समय: 15 फरवरी 2026 की रात 11:52 बजे से लेकर 16 फरवरी 2026 की रात 12:42 बजे तक।
