शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शुक्रवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पॉक्सो मामले में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने के फैसले का स्वागत किया और अपने ऊपर लगे आरोपों को “झूठा” बताया। वाराणसी स्थित उनके आश्रम में शिष्यों और समर्थकों ने इस फैसले का जश्न मनाया।
आध्यात्मिक गुरु पर एक नाबालिग समेत दो व्यक्तियों के यौन शोषण का आरोप है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और आदेश दिया है कि मार्च के तीसरे हफ्ते में फैसला सुनाए जाने तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
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न्यायालय ने राज्य सरकार और शिकायतकर्ता को इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने को कहा है और याचिकाकर्ता को जांच में सहयोग करने का आदेश दिया है। उच्च न्यायालय द्वारा अंतरिम सुरक्षा दिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “हमारे वकीलों ने न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया कि ये बच्चे कभी हमारे साथ नहीं रहे। बच्चे खुद कह रहे हैं कि वे ज्योतिर्मठ में रहे, हमारे साथ नहीं।”
अपने ऊपर लगे आरोपों को “मनगढ़ंत” बताते हुए संत ने न्यायपालिका में अपना विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “बटुक (युवा शिष्य) कभी आश्रम में नहीं रुके। इस घटना से पूरा हिंदू समुदाय आहत हुआ। हम अदालत के फैसले का स्वागत करते हैं।” उच्च न्यायालय के आदेश के बाद शिष्य और श्रद्धालु वाराणसी के श्री विद्या मठ में एकत्रित हुए और संत को मिली अंतरिम राहत का जश्न मनाने के लिए मिठाई बांटी।
अदालत में चल रहे घटनाक्रम से पहले अविमुक्तेश्वरानंद ने शुक्रवार को कहा कि अगर नार्को एनालिसिस टेस्ट से उनके खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न मामले में सच्चाई का पता चलता है, तो वे इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, “अगर नार्को टेस्ट से सच्चाई का पता चल सकता है तो इसे जरूर किया जाना चाहिए। सच्चाई का पता लगाने के लिए जो भी तरीके उपलब्ध हैं, उन्हें अपनाया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा, “झूठ ज्यादा देर तक नहीं टिकता। झूठी कहानी गढ़ने वालों का पर्दाफाश हो रहा है। जैसे-जैसे लोगों को इस मनगढ़ंत मामले के बारे में पता चलेगा, सच्चाई सामने आ जाएगी।”
चिकित्सा रिपोर्ट से जुड़े दावों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “चिकित्सा रिपोर्ट हमारी संलिप्तता कैसे साबित कर सकती है? ये कहा जा रहा है कि रिपोर्ट में दुराचार साबित हुआ है। ये किसी का बयान हो सकता है, लेकिन इतने दिनों बाद की गई चिकित्सा रिपोर्ट का क्या मतलब है?”
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आध्यात्मिक गुरु ने तर्क दिया कि यदि कोई कुकर्म हुआ भी हो, तो इससे स्वतः ही यह सिद्ध नहीं हो जाता कि कौन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा, “जो बच्चा कभी हमारे पास आया ही नहीं, उसे आसानी से हमारे नाम से नहीं जोड़ा जा सकता।” संत ने ये भी आरोप लगाया कि बच्चे शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी उर्फ पांडे के साथ रह रहे थे और उन्होंने सवाल उठाया कि उन्हें बाल सुधार गृह क्यों नहीं भेजा गया।
उन्होंने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि बच्चों को हरदोई के एक होटल में रखा गया था और उन्हें पत्रकारों से मिलने नहीं दिया गया था। उन्होंने पुलिस पर शिकायतकर्ता को बचाने और उसके खिलाफ बयान तैयार करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “चाहे कितनी भी मनगढ़ंत कहानी गढ़ी जाए, सच्चाई अंततः सामने आ ही जाएगी।” गुरुवार को अविमुक्तेश्वरानंद ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया है और दावा किया कि ये कानून झूठे मामले दर्ज कराने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान करता है।
