महापुरुषों की जयंती मनाने और खनन के मामले में CM नायब सैनी ने विपक्ष को दिया करारा ज़वाब

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हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बजट सत्र के दौरान विपक्ष द्वारा महापुरुषों की जयंती मनाने में किए गए खर्च पर कैग की रिपोर्ट में आपत्ति दर्ज करने और खनन के मामले में प्रसाद की रिपोर्ट पर उठाए गए सवालों पर करारा ज़वाब दिया।

मुख्यमंत्री ने सदन के सदस्य डॉ. रघुबीर कादियान द्वारा प्रदेश में महापुरुषों की जयंतियों के आयोजन पर किए गए खर्च को लेकर कैग द्वारा आपत्ति दर्ज करवाने के आरोप का भी कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज को उसके इतिहास, उसकी परंपराओं और उसके महापुरुषों से मार्गदर्शन मिलता है। इसी के आधार पर समाज अपने भविष्य को तय करता है। यही कारण है कि हमने वर्ष 2022 में संत-महापुरुष विचार सम्मान एवं प्रसार योजना शुरू की। इस योजना के तहत वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 21 महापुरुषों की जयंतियां राज्य स्तर पर पूरे सम्मान और गरिमा के साथ मनाई गई। इन जयंतियों पर 10 करोड़ 72 लाख रुपये की राशि खर्च हुई है। इन आयोजनों का उद्देश्य समाज को उन महापुरुषों के विचारों, उनके संघर्ष और उनके आदर्शों से प्रेरित करना था, जिन्होंने देश और समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उन्होंने महापुरुषों के नाम गिनाते हुए बताया कि प्रजापति जयंती, गुरु गोरखनाथ जी, भगवान विश्वकर्मा जयंती, महर्षि वाल्मीकि जी, धन्ना भगत, महाराणा प्रताप जयंती, भगवान परशुराम, महेश्वरी अहिल्या बाई होल्कर, संत कबीर जयंती, बाबा मखन शाह व बाबा लक्खी शाह बंजारा, गोस्वामी तुलसीदास जी, विभाजन विभीषिका दिवस, अग्रसेन जयंती, दादा कुशाल सिंह दहिया, शूरसैनी जयंती, सेन भगत जयंती, गुरु ब्रह्मानंद जयंती, वीर बाल दिवस, गुरु रविदास जयंती, महर्षि कश्यप जयंती, पंडित जसराज जयंती पूरी श्रद्धा एवं सम्मान पूर्वक मनाई गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम महापुरुषों को सम्मान देते हैं तो वह किसी एक दल या विचारधारा का विषय नहीं होता। बल्कि, वह पूरे समाज की साझा विरासत का सम्मान होता है। आज प्रदेश के युवा और नई पीढ़ी इन कार्यक्रमों के माध्यम से अपने महान नायकों के जीवन से प्रेरणा ले रही है। इसलिए, इसे अनावश्यक खर्च या घोटाले का नाम देना उन महापुरुषों का भी अनादर है।

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उन्होंने डॉ कादियान से सवाल किया कि यदि वे चाहते हैं कि इनमें से किसी की जयंती पर वर्ष 2026-27 में राज्य सरकार को 50 लाख रुपये औसत से कम खर्च ने चाहिए तो उनके नाम बता दें। उन्होंने डॉ रघुबीर कादियान के आरोप को पूरी तरह निराधार, भ्रामक और वास्तविकता से परे बताते हुए कहा कि सरकार के समक्ष कैग की ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं आई है, जिसमें महापुरुषों की जयंतियों के आयोजन पर खर्च को लेकर किसी प्रकार की अनियमितता या आपत्ति दर्ज की गई हो।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष के सदस्यों से कहा कि यदि उनके विचार में उपरोक्त 21 महापुरुषों के अलावा कोई ऐसा महापुरुष रह गया है, जिनकी जयंती को मनाया जाना चाहिए, तो वे नाम बताएं ,उसकी जयंती को पूरे आदर और गरिमा के साथ मनाया जाएगा। उन्होंने सदन के एक अन्य सदस्य द्वारा भगवान परशुराम जी के नाम से स्मृति स्थल बनाने की मांग पर जानकारी दी कि राज्य सरकार ने रोहतक, सेक्टर-26 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के माध्यम से 4 एकड़ भूमि पर भगवान परशुराम जी के नाम से पार्क एवं स्मृति स्थल विकसित करने का निर्णय ले लिया है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सदन के सदस्य भारत भूषण बतरा द्वारा खनन से संबंधित उठाए गए मुद्दे पर कहा कि डाडम खान के मई 2022 में निलंबित किए जाने के बाद कोई हादसे की सूचना नहीं है। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व , न्यायालय में दायर मामले OA No- 169/2020 (Kuldeep Vs State of Haryana) के संदर्भ में माननीय न्यायाधिकरण के निर्देशों के बाद सरकार द्वारा एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए सेवानिवृत्त माननीय जस्टिस प्रीतमपाल जी की अध्यक्षता में 20 जुलाई, 2021 को 6 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था। इसके उपरांत, 1 जनवरी, 2022 को डाडम खान में हादसे में 6 लोगों की जान जाने की सूचना मिलने पर एन.जी.टी. द्वारा स्वयं संज्ञान लेते हुए 8 सदस्यीय समिति का गठन किया गया।

उन्होंने बताया कि इसके बाद इस मामले की छानबीन के लिए 18 जनवरी, 2022 को एस.एस. प्रसाद की अध्यक्षता में समिति गठित की गई। समिति ने संबंधित विभागों के रिकॉर्ड, फील्ड निरीक्षण, तकनीकी तथ्यों और विशेषज्ञ राय के आधार पर अपनी रिपोर्ट दी। प्रसाद कमेटी द्वारा 16 सितंबर, 2022 को अपनी रिपोर्ट में कुल 5 प्रमुख सिफारिशें की गई हैं। इनमें- खनन योजना के अनुसार पट्टाधारी को कम से कम 70° का ढाल बनाए रखना था तथा 10 मीटर चौड़ाई एवं 10 मीटर ऊंचाई की बेंच बनानी थी। निदेशक, खान एवं भूविज्ञान हरियाणा द्वारा की गई कन्टूर मैपिंग के अनुसार ढाल 75° से 80° के बीच पाई गई तथा पट्टाधारी द्वारा 10 मीटर चौड़ाई एवं 10 मीटर ऊंचाई की बेंच भी नहीं बनाई गई। इन शर्तों का उल्लंघन कर अधिक खनिज निकाला गया। समिति ने अतिरिक्त खनिज का आकलन कर पट्टाधारी पर दण्ड लगाने की बात कही है।

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उन्होंने बताया कि इस विषय में, विभाग द्वारा गठित समिति ने 21 जुलाई, 2022 को स्थल का निरीक्षण कर 6 लाख 67 हजार 537 मीट्रिक टन अवैध उत्खनन का आकलन किया। अवैध खनन क्षेत्र 6019.5 वर्ग गज पाया गया। उपायुक्त भिवानी द्वारा 6732 वर्ग गज क्षेत्र में अतिक्रमण की सूचना दी गई। इसमें 712.5 वर्ग गज का अंतर सुलझाया जाना है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि विभाग द्वारा 5.45 हेक्टेयर क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील बताया गया। इसमें खनन डी.जी. खान सुरक्षा, गाजियाबाद द्वारा सुझाए गए सुधार कार्यों के बाद ही किया जाए। उन्होंने बताया कि विस्फोटक गतिविधियों से कंपन उत्पन्न होता है, जिससे ढीले पत्थरों में अस्थिरता आती है। इस विषय की भी आगे जांच आवश्यक है। पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए एक सुदृढ निगरानी तंत्र स्थापित करना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि उक्त पांच बिंदुओं में से 3 बिंदु पर्यावरण मंजूरी तथा 2 बिंदु अवैध खनन से संबंधित हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस संबंध में संबंधित फर्म को एन.जी.टी. द्वारा रिटायर्ड जस्टिस प्रीतम पाल जी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट 25 मार्च, 2022 तथा दूसरी 8 सदस्य समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट 1 अप्रैल, 2022 के आधार पर पहले ही कारण बताओ नोटिस दिए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उक्त खनन के मामले में सरकार ने पूरी पारदर्शिता और गंभीरता से जांच प्रक्रिया को पूरा करवाया है।

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