Delhi: बेहतर मस्तिष्क एक बेहतर विश्‍व का निर्माण करते हैं: वैश्विक ध्यान सम्मेलन में उपराष्ट्रपति

Delhi: उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज भारत मंडपम में आयोजित ध्यान नेताओं के वैश्विक सम्मेलन – समग्र जीवन और शांतिपूर्ण विश्व के लिए ध्यान को संबोधित किया। इस सम्मेलन का आयोजन पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटीज मूवमेंट और बुद्ध-सीईओ क्वांटम फाउंडेशन ने किया।उपराष्ट्रपति ने आयोजकों, वक्ताओं, ध्यान गुरुओं और प्रतिभागियों को बधाई देते हुए समग्र जीवन और वैश्विक शांति के मार्ग के रूप में ध्यान को बढ़ावा देने के प्रति उनके समर्पण की सराहना की।

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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने पूजनीय तमिल संत तिरुमूलर की शिक्षाओं को याद करते हुए कहा कि ध्यान एक आंतरिक दीपक जलाने के समान है जो अज्ञान को दूर करता है और सत्य एवं शांति की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि तिरुमूलर ने मानव शरीर को मंदिर और ध्यान को भीतर के दैवीय स्वरूप को जानने का साधन बताया है।आज विश्‍व कई चुनौतियों से जूझ रहा है, इस बात को देखते हुए उन्होंने कहा कि द्वंद्व केवल बाहरी ही नहीं, बल्कि व्यक्तियों के भीतर भी होता है। इस संदर्भ में उन्होंने जोर दिया कि ध्यान शांति, स्पष्टता और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करके दूसरों को सुनने और समझने की क्षमता को बढ़ाने में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकता है।

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उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि ध्यान की असली शक्ति मनुष्य के रूपांतरण में निहित है। उन्होंने कहा कि ध्यान तनाव कम करने, एकाग्रता बढ़ाने, भावनात्मक लचीलापन बढ़ाने और अत्यधिक सोचने और अत्यधिक काम करने जैसी समस्याओं से निपटने में सहायक होता है।

उपराष्ट्रपति ने सार्थक जीवन की कीमत पर भौतिक सफलता की निरंतर खोज के प्रति आगाह किया और कहा कि धन सुख-सुविधाओं का साधन तो होना चाहिए लेकिन जीवन पर हावी नहीं होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ध्यान चिंतन को बढ़ाता है और व्यक्तियों को संतुलित और संतुष्ट जीवन जीने में सक्षम बनाता है। उन्होंने इस धारणा को भी खारिज किया कि ध्यान केवल आध्यात्मिक साधकों के लिए है और कहा कि यह सभी के लिए है और सामान्य व्यक्तियों को उच्च चेतना की ओर ले जा सकता है।

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