सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से जबरन हटाया गया, संसद सत्र से पहले बढ़ा राजनीतिक घमासान

सोनम वांगचुक को आज अचानक जंतर मंतर से जबरन हटा कर अस्पताल में भर्ती कर दिया गया है। सोनम वांगचुक शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP पार्टी के समर्थन में अनशन कर रहे थे। इस घटनाक्रम ने संसद सत्र से पहले राजनीतिक घमासान बढ़ा दिया है।

आज दिल्ली के जंतर मंतर पर एक बड़ी घटना ने पूरे देश में हलचल बढ़ा दी है। लद्दाख के प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक को 21वें दिन की भूख हड़ताल के दौरान दिल्ली पुलिस ने जबरन हटा लिया है। उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों और चिकित्सकीय सलाह के आधार पर बताई जा रही है, लेकिन समर्थकों का आरोप है कि यह जबरदस्ती थी।

संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले इस घटना ने राजनीतिक घमासान को भड़का दिया है। इस घटना पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कई नेताओं ने इसे ‘तानाशाही’ करार दिया। सोनम वांगचुक को फिल्म और सामाजिक क्षेत्र से भी समर्थन मिल रहा है। जंतर मंतर पर अब भारी सुरक्षा व्यवस्था है, सड़कें सील हैं। संसद सत्र शुरू होने से पहले यह आंदोलन पूरे देश में छात्रों और युवाओं के बीच गूंज रहा है।

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सोनम वांगचुक 28 जून से CJP के समर्थन में जंतर मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। उनका मुख्य मांग NEET-UG और अन्य परीक्षा पेपर लीक मामलों को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी, साथ ही शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की। 20 दिनों में उन्होंने काफी वजन घटाया था और स्वास्थ्य बिगड़ रहा था। आज सुबह दिल्ली पुलिस की टीम जंतर मंतर पहुंची। सोनम वांगचुक को जबरन उठाया गया और सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया।

CJP संस्थापक अभिजीत दीपके का आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की और सोनम सर को जबरन हटाया। दीपके ने खुद अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है और संसद की ओर मार्च का ऐलान किया है। वहीं सोनम की पत्नी अस्पताल पहुंचीं और परिवार की सहमति के बिना इलाज ना करने की मांग की है।”

दिल्ली पुलिस का कहना है कि हाई कोर्ट के आदेश और डॉक्टरों की सलाह पर यह कदम उठाया गया, ताकि सोनम की जान बचाई जा सके। अस्पताल में उनकी स्वास्थ्य जांच चल रही है। बहरहाल यह घटना लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी पर सवाल उठा रही है।सवाल उठाए जा रहे हैं कि सरकार शिक्षा सुधारों पर ध्यान देने की बजाय दमन का रास्ता अपना नहीं है। इस घटना ने 20 जुलाई से शुरू हो रहे हैं संसद सत्र से पहले राजनीतिक घमासान बढ़ा दिया है।

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