UP: मायावती के बेहद करीब से सियासी दूरी तक पहुंचे अशोक सिद्धार्थ! समधी के रिश्ते के बाद क्यों बिगड़ी बात?

UP

UP: कभी BSP में मिला बड़ा कद, फिर आकाश आनंद की सियासत और पार्टी अनुशासन को लेकर बढ़ता गया टकराव…एक समय ऐसा था जब पार्टी में उनकी गिनती मायावती के बेहद भरोसेमंद लोगों में होती थी। लेकिन आगे चलकर …

News Desk: बहुजन समाज पार्टी की राजनीति में अशोक सिद्धार्थ का सफर काफी अहम रहा है। सरकारी नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे मायावती के भरोसेमंद नेताओं में अपनी जगह बनाई। संगठन में उन्हें कई बड़ी जिम्मेदारियां मिलीं। वह विधान परिषद और राज्यसभा तक पहुंचे। पार्टी के विस्तार के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश के बाहर भी काम सौंपा गया। इसी दौरान उनका रिश्ता मायावती के परिवार से भी जुड़ गया। उनकी बेटी डॉ. प्रज्ञा सिद्धार्थ की शादी मायावती के भतीजे आकाश आनंद से हुई। इस रिश्ते के बाद अशोक सिद्धार्थ का कद सिर्फ संगठन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह मायावती के परिवार के समधी भी बन गए। एक समय ऐसा था जब पार्टी में उनकी गिनती मायावती के बेहद भरोसेमंद लोगों में होती थी। लेकिन आगे चलकर राजनीतिक समीकरण बदलते गए और उनके लिए पार्टी में हालात मुश्किल होते चले गए। UP

Read Also: Delhi: भारत मंडपम में BRICS का पावर शो, 3 दिन बदली रहेगी दिल्ली की चाल

अशोक सिद्धार्थ और BSP नेतृत्व के बीच मतभेदों की चर्चा लगातार बढ़ती गई। पार्टी ने उन पर संगठन से जुड़े निर्देशों और अनुशासन का पालन नहीं करने के आरोप लगाए। अगस्त 2026 में मायावती ने उन्हें फिर से BSP से बाहर कर दिया। यह पहली बार नहीं था जब अशोक सिद्धार्थ पर पार्टी की कार्रवाई हुई। इससे पहले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया था, हालांकि बाद में उनकी वापसी हो गई थी। इस बार मायावती का रुख ज्यादा सख्त रहा। उन्होंने साफ किया कि उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल नहीं किया जाएगा। इसी दौर में आकाश आनंद की राजनीतिक भूमिका भी चर्चा में रही। मायावती के उत्तराधिकारी के तौर पर देखे जाने वाले आकाश आनंद और पार्टी के पुराने संगठनात्मक ढांचे के बीच तालमेल को लेकर कई सवाल उठे। अशोक सिद्धार्थ का प्रभाव और आकाश आनंद से उनका पारिवारिक रिश्ता भी इस पूरे घटनाक्रम में चर्चा का विषय बना रहा। हालांकि, पार्टी की ओर से कार्रवाई का मुख्य आधार अनुशासन और संगठन से जुड़े आरोप ही बताए गए।UP

Read Also: Bharat ने बढ़ाई परमाणु ताकत! 190 वॉरहेड का दावा, क्या है वो प्लान… थर-थर कांपेगा पाकिस्तान?

इसके बाद घटनाक्रम ने एक और बड़ा मोड़ लिया। 10 सितंबर को अशोक सिद्धार्थ ने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने का ऐलान कर दिया। उन्होंने मायावती के नेतृत्व और BSP के मिशन को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई, लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया कि अब वह राजनीति में सक्रिय नहीं रहेंगे। इसके तुरंत बाद मायावती ने आकाश आनंद को भी पार्टी से पूरी तरह अलग करने का फैसला सुनाया। मायावती ने आकाश के रवैये और पार्टी हित को लेकर गंभीर सवाल उठाए। इस फैसले के साथ एक बात साफ हुई कि BSP में पारिवारिक रिश्तों से ऊपर पार्टी नेतृत्व और संगठन का फैसला रहेगा। अशोक सिद्धार्थ के मामले ने यह भी दिखाया कि राजनीति में लंबे समय की नजदीकी और पारिवारिक संबंध हमेशा सियासी रिश्तों को बचा नहीं सकते। कभी मायावती के बेहद करीबी माने जाने वाले अशोक सिद्धार्थ अब BSP की सक्रिय राजनीति से बाहर हैं और उनका राजनीतिक सफर एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां व्यक्तिगत रिश्ते और सियासी फैसले दोनों अलग-अलग दिखाई दे रहे हैं।UP

Top Hindi NewsLatest News Updates, Delhi Updates, Haryana News, click on Delhi FacebookDelhi twitter and Also Haryana FacebookHaryana Twitter

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *