Budget 2026 : बाजार के प्रतिभागी आगामी केंद्रीय बजट की ओर काफी उम्मीदों से देख रहे हैं। उन्हें भरोसा है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के नए बजट से निवेशकों के मनोबल को बढ़ावा मिलेगा।फंड मैनेजरों और बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से रविवार को बजट पेश किए जाने के बाद नकदी बाजार को और मजबूत करने और लंबे समय के लिए विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के उपायों पर बारीकी से नजर रखी जाएगी।बाजार के प्रतिभागियों की प्रमुख अपेक्षाओं में से एक प्रतिभूति लेनदेन कर यानी एसटीटी है।Budget 2026 Budget 2026 Budget 2026
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निवेशकों का कहना है कि इसमें डेरिवेटिव सेगमेंट की तुलना में कम ट्रेडिंग वॉल्यूम और भागीदारी है, जिसका आंशिक कारण उच्च लेनदेन लागत है।
एसटीटी एक प्रत्यक्ष कर है, जो स्टॉक एक्सचेंजों पर प्रतिभूतियों की खरीद और बिक्री पर लगाया जाता है।मौजूदा समय में डिलीवरी-आधारित इक्विटी लेनदेन पर लगभग 0.1 फीसदी का एसटीटी लगता है, जबकि इंट्राडे ट्रेड और डेरिवेटिव पर कम दरें लागू होती हैं।एक अन्य अहम मांग दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) कर है।Budget 2026 Budget 2026
मौजूदा नियमों के तहत एक साल से ज्यादा समय तक रखे गए इक्विटी निवेश से होने वाले लाभ पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ के रूप में कर लगाया जाता है।
जबकि एक लाख पच्चीस हजार रुपये प्रति वर्ष तक के लाभ पर कर छूट है, उससे अधिक के किसी भी दीर्घकालिक सकल घरेलू उत्पाद (एलटीजीसी) पर 12.5 फीसदी की दर से कर लगता है।करों को युक्तिसंगत बनाने की मांग घरेलू बाजारों में विदेशी निवेशकों की ओर से भारी बिकवाली के बीच सामने आई है।
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2025 में उन्होंने एक लाख छियासठ हजार करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के शेयर बेचे, जो अब तक का सबसे बड़ी सालाना निकासी है।विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि किसी बड़े कर सुधार की उम्मीद नहीं है लेकिन बाजार में टकराव को कम करने, निवेशकों का भरोसा बढ़ाने और निरंतर पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए छोटे छोटे कदम घरेलू बाजारों को मजबूती देने में काफी मददगार साबित हो सकते हैं।नए बजट में बाजार के अनुकूल कर नीति और पूंजी बाजार सुधारों के प्रति सरकार का नजरिया अहम होगा। Budget 2026 Budget 2026
