Central Cabinet: केंद्रीय कैबिनेट ने हाल ही में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जो देश के विकास और प्रगति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में मदद करेंगी। इन परियोजनाओं में दिल्ली-अंबाला के बीच तीसरी और चौथी लाइन, ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे टनल, नोएडा मेट्रो का विस्तार, और अर्बन चैलेंज फंड (UCF) शामिल हैं।
1. दिल्ली-अंबाला तीसरी और चौथी लाइन
केंद्रीय कैबिनेट ने दिल्ली-अंबाला के बीच तीसरी और चौथी लाइन बनाने को मंजूरी दी है। इस परियोजना की लंबाई 194 किमी है और इसकी अनुमानित लागत 5,983 करोड़ रुपये है। इस परियोजना को पूरा करने में 4 साल का समय लगेगा। यह परियोजना दिल्ली-जम्मू को चार गुना करने की कोशिशों का हिस्सा है और यह बहुत ज्यादा इस्तेमाल होने वाला नेटवर्क भी माना जा रहा है। यह नेशनल कैपिटल रीजन को उत्तरी राज्यों से जोड़ने वाला मुख्य रूट है और पैसेंजर और मालगाड़ियों की ज्यादा डिमांड है।
2. ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे टनल
केंद्रीय कैबिनेट ने ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे टनल बनाने को मंजूरी दी है। यह टनल गोहपुर और नुमालीगढ़ (असम) को जोड़ेगी। यह 4-लेन अंडरवाटर टनल है और इसकी लंबाई 15.8 किमी है। यह भारत की पहली अंडरवाटर ट्विन ट्यूब रोड कम रेल टनल है। इस परियोजना की लंबाई 34 किमी है और इसकी लागत 18,662 करोड़ रुपये है। इस परियोजना को पूरा करने में 5 साल का समय लगेगा। इस टनल की विशेषताओं के बारे में बात करें तो यह टनल पूर्वोत्तर भारत को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने में मदद करेगी। साथ ही भारत के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। Central CabinetCentral Cabinet
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3. नोएडा मेट्रो का विस्तार
केंद्रीय कैबिनेट ने नोएडा मेट्रो के विस्तार को मंजूरी दे दी है। यह विस्तार बॉटनिकल गार्डन से नोएडा तक एक्वा लाइन के विस्तार के रूप में होगा। इस परियोजना की लंबाई 11.6 किमी है और इसमें 8 नए एलिवेटेड स्टेशन बनाए जाएंगे। इस परियोजना की लागत 2,254 करोड़ रुपये है और इसे पूरा करने में 4 साल का समय लगेगा। यह प्रोजेक्ट नोएडा के लोगों को दिल्ली और अन्य शहरों से बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।साथ ही व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद करेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।
4. अर्बन चैलेंज फंड (UCF)
केंद्रीय कैबिनेट ने अर्बन चैलेंज फंड (UCF) को मंजूरी दी है। इस फंड का उद्देश्य शहरों के विकास के लिए प्राइवेट सेक्टर को शामिल करना है। इस फंड के तहत 1 लाख करोड़ रुपये की सेंट्रल मदद दी जाएगी, जिससे 4 लाख रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स बनेंगे। इस फंड का उद्देश्य शहरों के विकास में सुधार करना और प्राइवेट सेक्टर को शामिल करना है।
