नई दिल्ली: फेसबुक की मुसीबतें दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही हैं। रोहिंग्याओं के संगठनों ने अमेरिका और ब्रिटेन में कंपनियो पर कुछ केस डाले जिसमें फेसबुक पर नफरती भाषणों को बढ़वा देने का आरोप लगा है। रोहिंग्याओं ने फेसबुक को म्यांमार में रोहिंग्याओं के नरसंहार के लिए जिम्मेदार बताया है। आरोप में कहा गया की फेसबुक की लापरवाही के चलते एल्गोरिदम ने ‘हेट-स्पीच’ को बढ़वा दिया, जिस वजह से म्यांमार में रोहिंग्यों का नरसंहार मुमकिन हुआ।
सूत्रों के मुताबिक फेसबुक पर 150 अरब डॉलर के साथ मुआवज़े की बात की गई है। अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फेसबुक ने दक्षिण एशिया में एक छोटे देश की बाजार में बेहतर तरीके से पकड़ बनाने के लिए जानबूझकर रोहिंग्याओं की जान का सौदा किया।
शिकायत में आगे कहा गया- “आखिर में म्यांमार में फेसबुक के पास हासिल करने के लिए काफी कम था, लेकिन रोहिंग्याओं पर इसके नतीजे इससे भयानक नहीं हो सकते थे। इसके बावजूद फेसबुक ने जरूरी साधन होने के बावजूद गलत बयानी रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया, बल्कि पहले के ढर्रे पर ही आगे बढ़ता रहा।”
ब्रिटेन में वकीलों की तरफ से फेसबुक को जो चिट्ठी भेजी गई है, उसमें साफ कहा है कि उनके मुवक्किल (रोहिंग्या) और उनके परिवारों को म्यांमार के नागरिक कट्टरपंथी और सत्तापक्ष के अभियान की वजह से गंभीर हिंसा, हत्या और मानवाधिकारों के उल्लंघन का सामना करना पड़ा है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जो म्यांमार में 2011 में लॉन्च हुआ और बाद में देशव्यापी बन गया, इसने रोहिंग्याओं के खिलाफ चलाए गए अभियान में मदद की। ब्रिटेन के वकील जल्द ही इस मामले में हाईकोर्ट में केस दाखिल करने वाले हैं और वे बांग्लादेश के रिफ्यूजी कैंपों में रह रहे रोहिंग्याओं का पक्ष सामने रखेंगे।
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