Kashmiri Apple Plum: सेहत की तरफ बढ़ते रुझान को देखते हुए ज्यादा से ज्यादा लोग आर्गेनिक खेती तरफ आकर्षित हो रहे हैं ऐसा ही एक प्रयास करनाल के किसान रमन का है जो रसायनिक उर्वरकों के प्रयोग के बिना कश्मीरी ऐपल बेर की ऑर्गेनिक खेती से ले रहे है लाखों का मुनाफा, दूसरे किसान भाइयों को सलाह कि रसायनिक खेती को छोड़ प्राकृतिक खेती से भी ऐसे फलों की पैदावार प्राप्त कर लोगों की अच्छी सेहत सहित उत्पादकों को भी दे सकती है लाखो का मुनाफा, रमन के इन प्रयासों को ताकने के लिए केवल देश नही बल्कि विदेशी लोगों का भी तांता लगा हुआ है।
Read Also: Himachal Pradesh: शिमला में झमाझम बारिश, ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी से मौसम हुआ सुहावना
बता दें कि थाईलैंड से आयातित प्रजाति का कश्मीरी एप्पल बेर प्रदेश के किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो रही है। दरअसल विदेशी प्रजाति के बेर की खेती महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बंगाल, केरल आदि राज्यों में होती है। रमन ने इसकी सफल खेती करके प्रदेश के अन्य किसानों को इसकी खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया है।
Read Also: थेनी बॉर्डर के पास वैन और कार की जोरदार टक्कर… हादसे में केरल के 3 लोगों की मौत, 18 घायल
इसके साथ ही आपको बता दें कि इस प्रजाति का एप्पल बेर रंग और आकार में हूबहू सेब की तरह दिखता है। खास बात यह है कि इसमें सेब और बेर दोनों का स्वाद आता है। एक वर्ष से भी कम समय में फलोत्पादन वाले इस एप्पल बेर की बागवानी कम ऊंचाई वाले पहाड़ (जहां न्यूनतम तापमान माइनस में न जाता हो) और मैदानी भागों में की जा सकती है। किसान अब आधुनिक खेती की और अपना रुख कर रहे हैं। इसी कड़ी में करनाल के सांभली गांव के रमन ने 2 एकड़ जमीन पर एक प्रयोग किया है। रसायनिक उर्वरकों के बिना कश्मीरी रेड एप्पल बेर की ऑर्गेनिक खेती से वह लाखों का मुनाफा ले रहे हैं। इस फल का स्वाद, मिठास व गुणवत्ता अदभुत है।
रमन ने कैसे और कब की इस खेती की शुरुआत ?
रमन बताते है कि अपने एक मित्र की सलाह से उन्होंने 2020 में उन्होंने 2 एकड़ जमीन पर कश्मीरी एप्पल बेर के लगभग 200 पौधे लगाकर इस खेती की शुरुआत की। इन पौधों में ज्यादा खाद पानी की जरूरत नही है।रमन बताते है कि इस किस्म के पेड़ की ग्रोथ बहुत ही जल्दी होती है और फल भी जल्दी आ जाता है। 2020 जून के महीने में हमने इसका पौधा रोपण किया और 2021 फरवरी के महीने में हमने इसका फल लेना शुरू कर दिया था।पहले इस पर लाल रंग आता है फिर संतरी ओर फिर यह पीले रंग में आ जाता है। यह फल वेहद मीठा होता है।
Read Also: विवादित पोस्ट करने वाले बांग्लादेशी छात्रों की पढ़ाई पर रोक, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का फैसला
इस खाती की कैसे की जाती है देखभाल ?
रमन बताया है कि ज्यादातर इस किस्म के पौधों की सामान्य कोई विशेष देखभाल की जरूरत नहीं होती है। आमतौर पर इसमें बारिश के पानी से ही काम चल जाता है। फरवरी से अप्रैल महीने तक इसका फल उतारने के बाद पेड़ो की कटिंग की जाती है। सितंबर के महीने में जैसे ही पेड़ों पर फ्लोवेरिंग होनी शुरू हो जाती है तड़ पेड़ो की जड़ के आसपास पानी को एकत्रित नहीं होने देना चाहिये। बस इन्ही बातों का ध्यान रखने से हम अच्छा फल इन पेड़ों से प्राप्त कर सकते हैं। रमण बताते है कि इस कश्मीरी एप्पल बेर का स्वाद,मिठास और गुणवत्ता में अदभुत है। पौधों में बीमारी को लेकर रमन ने बताया कि वैसे तो बीमारियां हर पौधों में लगती हैं लेकिन अब तक हमारे अनुभव के अनुसार हमें कोई भी बीमारी का सामना नहीं करना पड़ा है। इसको हम बीमारी मुक्त पौधा भी कह सकते है।
कितनी होती है पैदावार ?
रमन बताते है कि अनुमानित एक पौधे से 200 से 250 किलो फल की पैदावार हो जाती है जिसकी मंडी में कीमत रु 80 से रु 100 और रु 120 तक मिल जाती है।ऑर्गेनिक तरीके से खेती करने की विधि को रमन ने बहुत ही बढ़िया बताया,उन्होंने कहा कि इससे किसान भाई जहरीले स्प्रे करने से बच जाता है। आंकड़े बताते है कि हर वर्ष बहुत से किसानों की इन रसायनिक जहरीले पेस्टिसाइड का स्प्रे करते समय मौत हो जाती है। रसायनिक खेती से खुद भी बचो और दूसरों को भी बचाओ। शुद्ध खेती करके आप स्वंय, अपने परिवार व समाज सहित पूरे देश के लोगो को बड़ी से बड़ी घातक कैंसर जैसी बीमारियों से बचा सकते हो।
साथ ही रमन ने बताया कि देश विदेश से बहुत से लोग इस खेती से प्रभावित है। वो इस खेती की जानकारी लेने के लिए आते है। विदेशी लोग ऑर्गेनिक खेती की ओर काफी आकर्षित हो रहे है। जितनी भी हमें इस खेती के बारे में जानकारी है हम लोग उन्हें बताने का प्रयास करते है।
Top Hindi News, Latest News Updates, Delhi Updates,Haryana News, click on Delhi Facebook, Delhi twitter and Also Haryana Facebook, Haryana Twitter

