​चेन्नई: रामनाथ गोयनका साहित्य सम्मान के तीसरे संस्करण में शामिल हुए उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन

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Delhi News: उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन आज चेन्नई में आयोजित तीसरे रामनाथ गोयनका साहित्य सम्मान समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने साहित्यकारों और पत्रकारों को संबोधित करते हुए भारत की लोकतांत्रिक जड़ों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर ज़ोर दिया।उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में रामनाथ गोयनका जी को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें भारतीय लोकतंत्र का ‘अंतरात्मा रक्षक’ (Conscience-keeper) बताया। उन्होंने आपातकाल के दौर को याद करते हुए कहा कि गोयनका जी ने निडर पत्रकारिता के जरिए सेंसरशिप का विरोध किया था।

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उपराष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि समाचार पत्रों को कम से कम दो पेज राष्ट्रीय विकास और रचनात्मक विमर्श के लिए समर्पित करने चाहिए ताकि नागरिक अधिक जागरूक बन सकें.​विकसित भारत का लक्ष्य: उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि सामाजिक समावेश और सांस्कृतिक आत्मविश्वास से बनेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए उन्होंने मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली जैसी भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने की सराहना की।समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित किया. ​लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड: प्रख्यात कन्नड़ लेखक डॉ. चंद्रशेखर कंबारा।

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​बेस्ट फिक्शन: सुबी ताबा (अरुणाचल प्रदेश)।

​बेस्ट नॉन-फिक्शन: शुभांशी चक्रवर्ती।

​बेस्ट डेब्यू: नेहा दीक्षित।

​उपराष्ट्रपति ने अंत में सभी विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है और लेखकों की जिम्मेदारी सामाजिक सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने में सबसे महत्वपूर्ण

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