‘विकसित भारत’ के लिए भारतीय रेल का नया संकल्प, रेल मंत्री ने 101 अधिकारियों को किया सम्मानित

Railway Minister

नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित एक भव्य समारोह में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलकर्मियों को राष्ट्रीय रेल पुरस्कार से सम्मानित किया है। इस मौके पर रेलमंत्री ने भारतीय रेलवे के भविष्य का नया रोडमैप भी पेश किया है।

भारतीय रेलवे अब विकसित भारत की नई पहचान बनने की ओर अग्रसर है। दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में ’70वें अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार 2025′ का आयोजन किया गया। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे में असाधारण प्रदर्शन करने वाले 101 रेल अधिकारियों को पदक पहनाकर सम्मानित किया। इसके साथ ही, अलग-अलग श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 26 रेलवे जोनों को विजेता शील्ड प्रदान की गई।

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भारतीय रेल के 100 साल का सफर

इस मौके पर भारतीय रेल के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए Electrification के 100 वर्ष पूरे होने पर एक विशेष डाक टिकट भी जारी किया गया। कार्यक्रम में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सीईओ सतीश कुमार सहित रेलवे के तमाम बड़े आला अधिकारी मौजूद रहे। अपने संबोधन में रेल मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के 2047 के ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने के लिए सभी रेलकर्मियों को 6 ऐतिहासिक संकल्प दिलाए:

नवाचार (Innovation): रेलवे की कार्यप्रणाली में नई सोच और इनोवेशन को प्राथमिकता देना।
​52 हफ्तों में 52 सुधार: संस्थान के भीतर हर हफ्ते एक नया संगठनात्मक सुधार (Institutional Reform) लागू करना।
​आधुनिक ट्रैक मेंटेनेंस: पटरियों के रख-रखाव में पुरानी पद्धतियों को छोड़ नई तकनीक अपनाना।
शून्य दुर्घटना का लक्ष्य: यात्रियों को शत-प्रतिशत सुरक्षित यात्रा की गारंटी देना।
ट्रेनिंग में बदलाव: अधिकारियों और कर्मचारियों को बदलते समय के अनुसार प्रशिक्षित करना।
गुलामी की मानसिकता से मुक्ति: रेलवे से ब्रिटिश काल की पुरानी और औपनिवेशिक मानसिकता को पूरी तरह खत्म करना।

रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ​”पिछले एक दशक में हमने रेलवे का कायाकल्प देखा है, लेकिन अब समय है इसे दुनिया का सबसे आधुनिक और सुरक्षित नेटवर्क बनाने का। हमें औपनिवेशिक मानसिकता को पीछे छोड़कर एक आत्मनिर्भर और नवाचारी रेलवे का निर्माण करना होगा।”

​रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष सतीश कुमार ने भी साफ किया कि भारतीय रेल अब ‘गति, आराम और सुरक्षा’ के सिद्धांत पर काम कर रही है ताकि आम आदमी को विश्वस्तरीय अनुभव मिल सके। इन पुरस्कारों और संकल्पों ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय रेलवे अब सिर्फ पटरियों पर नहीं, बल्कि प्रगति के हाई-स्पीड ट्रैक पर दौड़ने के लिए तैयार है।

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