जनवरी में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रफ्तार! 55.4 पर पहुंचा PMI

India manufacturing PMI: Manufacturing sector picks up pace in January, PMI reaches 55.4

India manufacturing PMI: देश की विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में जनवरी में मामूली सुधार देखने को मिला। हालांकि नए ऑर्डर में तेजी से वृद्धि के बावजूद कारोबारी विश्वास साढ़े तीन साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। सोमवार यानी आज 2 फरवरी को जारी मासिक सर्वेक्षण में बात सामने आई। मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) दिसंबर के दो साल के निचले स्तर 55 से बढ़कर जनवरी में 55.4 रहा। खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) की भाषा में 50 से ऊपर का अंक विस्तार जबकि 50 से नीचे का अंक संकुचन दर्शाता है। India manufacturing PMI

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एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री (भारत) प्रांजुल भंडारी ने कहा, ‘‘ भारतीय विनिर्माण कंपनियों में जनवरी में सुधार देखा गया, जिसका कारण नए ऑर्डर, उत्पादन और रोजगार में वृद्धि रही। कच्चे माल की लागत में मध्यम वृद्धि हुई जबकि ‘फैक्ट्री-गेट’ कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी पड़ी जिससे विनिर्माताओं के मुनाफे पर हल्का दबाव पड़ा।’’ ‘फैक्ट्री-गेट’ कीमत का मतलब वे कीमत है जिस पर कोई उत्पाद उसके विनिर्माता के कारखाने या गोदाम से निकलता है। सर्वेक्षण में शामिल प्रतिभागियों ने कहा कि मांग में मजबूती, नए कारोबार में वृद्धि और प्रौद्योगिकी में निवेश ने उत्पादन को समर्थन दिया। कुल बिक्री को मुख्य रूप से घरेलू बाजार से गति मिली।

हालांकि, निर्यात के नए ऑर्डर में भी वृद्धि हुई लेकिन उसकी रफ्तार अपेक्षाकृत कमजोर रही। जिन कंपनियों के निर्यात ऑर्डर बढ़े, उन्होंने एशिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूरोप और पश्चिम एशिया से अधिक मांग का हवाला दिया। रोजगार के मोर्चे पर, वस्तु उत्पादक कंपनियों ने अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति जारी रखी। हालांकि, रोजगार सृजन की गति ‘मामूली’ रही जो पिछले तीन महीनों में सबसे तेज रही। India manufacturing PMI

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इस बीच, जनवरी में कारोबारी भरोसा साढ़े तीन साल के निचले स्तर पर आ गया। केवल 15 प्रतिशत कंपनियों ने आने वाले एक साल में उत्पादन बढ़ने की उम्मीद जताई जबकि 83 प्रतिशत ने उत्पादन में कोई बदलाव नहीं होने का अनुमान लगाया। भंडारी ने कहा, ‘‘नए ऑर्डर में तेज वृद्धि के बावजूद कारोबारी विश्वास कमजोर बना हुआ है और भविष्य के उत्पादन को लेकर उम्मीदें जुलाई 2022 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं।’’

कीमतों के मोर्चे पर सर्वेक्षण में कहा गया कि कच्चे माल की कीमतें चार महीनों के उच्चतम स्तर तक बढ़ीं लेकिन ‘आउटपुट’ (तैयार माल की) कीमतों में मुद्रास्फीति घटकर 22 महीने के निचले स्तर पर आ गई। एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण पीएमआई को एसएंडपी ग्लोबल ने करीब 400 कंपनियों के एक समूह में क्रय प्रबंधकों को भेजे गए सवालों के जवाबों के आधार पर तैयार किया।  India manufacturing PMI

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