अभिनेता राजपाल यादव को नौ करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में क्यों जाना पड़ा तिहाड़ जेल

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Rajpal Yadav Surrender : टीवी इंड्रस्ट्री के अभिनेता राजपाल यादव की तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण कर दिया है, जहां वे छह महीने की सजा काटेंगे। दिल्ली उच्च न्यायालय ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने लगभग नौ करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में बकाया चुकाने के लिए और समय मांगा था।ये मामला 2010 का ऋण न चुकाने से जुड़ा है, जब यादव ने अपनी निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग पांच करोड़ रुपये का ऋण लिया था।Rajpal Yadav Surrender  Rajpal Yadav Surrender  

फिल्म के असफल होने से उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा और ब्याज और जुर्माने के कारण बकाया राशि बाद में बढ़ गई।बकाया चुकाने के लिए यादव ने ऋणदाता को कई चेक जारी किए, जो बाउंस हो गए। जिसके कारण उन पर आपराधिक कार्यवाही शुरू हुई।अप्रैल 2018 में एक मजिस्ट्रेट अदालत ने यादव और उनकी पत्नी को कई चेक बाउंस मामलों में दोषी ठहराया और उन्हें छह महीने की कैद की सजा सुनाई।Rajpal Yadav Surrender  Rajpal Yadav Surrender 

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साल 2019 में एक सत्र न्यायालय ने इस फैसले को बरकरार रखा, जिसके बाद मामला दिल्ली उच्च न्यायालय पहुंचा।पिछले कुछ सालों में उच्च न्यायालय ने यादव को बकाया चुकाने के कई मौके दिए, किश्तों में भुगतान की इजाजत दी और समझौते में ईमानदारी से कदम उठाने की शर्त पर उनकी सजा को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया।हालांकि, बाद में अदालत ने बार-बार वचन न निभाने और सहमत भुगतान न करने पर सख्ती दिखाई।Rajpal Yadav Surrender 

इस मामले में आंशिक भुगतान किए गए लेकिन अदालत ने पाया कि काफी बड़ी रकम अभी भी बकाया है।अदालती रिकॉर्ड के अनुसार यादव को उनके खिलाफ दायर सात मामलों में से प्रत्येक में 1.35 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया था।अक्टूबर 2025 में 75 लाख रुपये के दो डिमांड ड्राफ्ट जमा किए गए, लेकिन कुल बकाया राशि लगभग नौ करोड़ रुपये दर्ज की गई।Rajpal Yadav Surrender  Rajpal Yadav Surrender 

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दो फरवरी को यादव को चार फरवरी तक जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया, ये देखते हुए कि उनका आचरण अदालत के आदेशों का लगातार उल्लंघन दर्शाता है।जब यादव निर्धारित समय के भीतर आत्मसमर्पण करने में विफल रहे तो उनके वकील ने धन की व्यवस्था करने के प्रयासों का हवाला देते हुए नरमी बरतने की अपील की।हालांकि, अदालत ने ये कहते हुए अपील खारिज कर दी कि नरमी अनिश्चित काल तक नहीं बरती जा सकती।

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न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि आत्मसमर्पण आदेश को वापस लेना गलत संदेश देगा और इस बात पर जोर दिया कि केवल फिल्म उद्योग से संबंधित होने के कारण कोई विशेष परिस्थिति नहीं बनाई जा सकती।पांच फरवरी को यादव अदालत में पेश हुए और 25 लाख रुपये का एक और डिमांड ड्राफ्ट तथा एक नया भुगतान प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

अदालत ने अपने पूर्व आदेश को वापस लेने से इनकार कर दिया और दोहराया कि न्यायिक करुणा और अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।उसी दिन बाद में यादव ने तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण किया।इस मामले ने फिल्म उद्योग का भी ध्यान खींचा है और यादव के आत्मसमर्पण के बाद कई अभिनेताओं और फिल्म निर्माताओं ने सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन किया है।यादव इस साल के अंत में रिलीज होने वाली फिल्मों “वेलकम टू द जंगल” और “भूत बंगला” में नजर आने वाले हैं।

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