Global Tariff: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए बड़े पैमाने पर ग्लोबल टैरिफ को बेअसर कर दिया है, लेकिन ट्रंप ने तुरंत जवाबी कदम उठाते हुए 10 प्रतिशत का नया ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। साथ ही, उन्होंने भारत को अपना मित्र देश बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पिछले साल लगाए गए व्यापक ग्लोबल टैरिफ को असंवैधानिक करार दिया। 6-3 के बहुमत से आए इस फैसले में कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का दुरुपयोग किया और कांग्रेस की मंजूरी के बिना ऐसे टैरिफ नहीं लगा सकते। यह ट्रंप की आर्थिक नीति को बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इन टैरिफ से अरबों डॉलर की कमाई हो रही थी और अब इंपोर्टर्स को रिफंड का मामला भी उठ सकता है।
हालांकि ट्रंप ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने जजों पर निशाना साधा साथ ही तुरंत एक नया कदम भी उठाया। ट्रंप ने अब ट्रेड एक्ट 1974 की सेक्शन 122 के तहत 10 प्रतिशत का ग्लोबल टैरिफ लगाने का एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया है। यह टैरिफ अस्थायी है और अधिकतम 150 दिनों तक लागू रह सकता है। यह 24 फरवरी से प्रभावी होगा और सभी देशों पर लागू होगा, हालांकि कुछ छूट संभव हैं। ट्रंप ने कहा कि यह टैरिफ पहले से मौजूद टैरिफ के ऊपर होगा और अमेरिकी ट्रेड डेफिसिट को ठीक करने के लिए जरूरी है।ट्रंप ने आगे सेक्शन 301 के तहत कई देशों के खिलाफ नई जांच शुरू करने का भी ऐलान किया, जिससे भविष्य में और टैरिफ लग सकते हैं।
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खास बात यह है कि ट्रंप ने इस मौके पर भारत का जिक्र किया। ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “ग्रेट फ्रेंड” और “पावरफुल लीडर” बताया। ट्रंप ने कहा कि भारत के साथ उनका रिश्ता शानदार है और हाल के ट्रेड डील से दोनों देशों को फायदा हुआ है। ट्रंप ने दोहराया कि मोदी के साथ दोस्ती और सम्मान की वजह से ही हालिया ट्रेड एग्रीमेंट हुआ, जिसमें टैरिफ कम किए गए थे। हालांकि, नए 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ के बाद भारत पर पहले से तय 18 प्रतिशत के बजाय अब 10 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा, जिसे कुछ विशेषज्ञ राहत के रूप में देख रहे हैं। ट्रंप ने कहा, “मोदी एक स्मार्ट लीडर हैं, हमने फेयर डील की है। भारत अब अमेरिका को टैरिफ नहीं चुकाता, लेकिन हम उन्हें चुकाते हैं – ये फेयर है।” यह घटनाक्रम वैश्विक बाजारों में हलचल मचा रहा है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इससे इन्फ्लेशन बढ़ सकता है और ट्रेड वॉर की आशंका है।
