Ministry of Commerce: वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार यानी आज 21 फरवरी को कहा कि सरकार अमेरिका में सीमा शुल्क से जुड़े ताजा घटनाक्रम और उसके संभावित प्रभावों का अध्ययन कर रही है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “शुक्रवार को सीमा शुल्क के बारे में आया अमेरिकी उच्चतम न्यायालय का फैसला हमारे संज्ञान में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस संबंध में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया है।” बयान में कहा गया, “अमेरिकी प्रशासन की तरफ से कुछ कदमों की घोषणा की गई है। हम इन सभी घटनाक्रमों का उनके प्रभावों के संदर्भ में अध्ययन कर रहे हैं।” ट्रंप की तरफ से पिछले साल भारत समेत करीब 60 देशों के खिलाफ जारी शुल्क आदेशों को अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को रद्द घोषित कर दिया।
इसके बाद ट्रंप ने 10 प्रतिशत वैश्विक सीमा शुल्क लगाने की घोषणा कर दी। ट्रंप की नवीनतम घोषणा के मुताबिक, अमेरिका 24 फरवरी से 150 दिनों की अवधि के लिए आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत का अस्थायी ‘एड-वेलोरम’ (मूल्य आधारित) आयात अधिभार लगाएगा। इससे पहले अमेरिका ने अगस्त में भारत पर 25 प्रतिशत का जवाबी शुल्क लगाया था। बाद में रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगा दिया जिससे कुल शुल्क बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुंच गया। हालांकि, फरवरी महीने की शुरुआत में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने पर सहमति बनी, जिसके तहत अमेरिका शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत हुआ है। रूसी कच्चे तेल की खरीद के लिए लगा दंडात्मक 25 प्रतिशत शुल्क हटाया जा चुका है जबकि शेष 25 प्रतिशत शुल्क प्रभावी चल रहा था।
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हालांकि अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के फैसले और ट्रंप की नई घोषणा के बाद भारतीय वस्तुओं पर शुल्क 10 प्रतिशत रह जाएगा। ये 10 प्रतिशत अधिभार अमेरिका में सर्वाधिक तरजीही देशों (एमएफएन) पर लागू मौजूदा शुल्क या अन्य आयात शुल्क के अतिरिक्त होगा। ट्रंप ने कहा है कि भारत के साथ व्यापार समझौते में कोई बदलाव नहीं हुआ है और ये प्रक्रिया जारी है। द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल 23 फरवरी, 2026 से वॉशिंगटन में अपने समकक्षों से मुलाकात करेगा। वर्ष 2021-25 के दौरान अमेरिका भारतीय उत्पादों का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा। भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत, आयात में 6.22 प्रतिशत और कुल द्विपक्षीय व्यापार में 10.73 प्रतिशत रही। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच व्यापार 186 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें 86.5 अरब डॉलर का निर्यात और 45.3 अरब डॉलर का आयात शामिल है।
