UP Politics: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की बढ़ी मुश्किलें, यौन शोषण मामले में FIR दर्ज

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UP Politics:  उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ पिछले एक साल में एक नाबालिग समेत दो व्यक्तियों के यौन शोषण के आरोपों को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई है। ये प्राथमिकी शनिवार देर रात दर्ज की गई। इससे पहले प्रयागराज की पॉक्सो अदालत ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे।जगद् गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने स्वामी विमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए हैं। UP Politics:

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अधिकारियों के अनुसार, बाल यौन अपराध संरक्षण (पॉक्सो) कानून और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई।स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद के अलावा दो-तीन अज्ञात लोगों पर भी मुकदमा दर्ज किया गया है।प्राथमिकी के अनुसार, वादी आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने दावा किया कि हाल में प्रयागराज में संपन्न माघ मेले में उनके ट्रस्ट द्वारा आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान एक नाबालिग लड़के समेत दो लोग आए और उन्होंने माघ मेले समेत धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान तथा एक गुरुकुल में यौन शोषण के आरोप लगाए।

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इसमें आरोप लगाया गया है कि ये कृत्य ‘‘गुरु सेवा’’ की आड़ में और धार्मिक प्रभाव का दुरुपयोग करके किए गए थे।शिकायतकर्ताओं ने दावा किया कि उन्होंने पहले झूंसी पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपे थे, लेकिन कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई, जिसके कारण उन्हें अदालत का रुख करना पड़ा।अदालत के निर्देश के बाद झूंसी पुलिस थाने ने शनिवार देर रात प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी।गिरफ्तारी के संबंध में पुलिस की ओर से तत्काल कोई बयान जारी नहीं किया गया है।उल्लेखनीय है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रयागराज के माघ मेला 2026 में मेला प्रशासन से टकराव को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। UP Politics:

उन्होंने मेला प्रशासन पर मौनी अमावस्या का स्नान नहीं करने देने का आरोप लगाया था।स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अदालत द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश के बाद शनिवार को वाराणसी में कहा था कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है और वे न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हैं। UP Politics: 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पत्रकारों से कहा था, ‘‘जी हां, यह सही और उचित है। क्योंकि मामला दर्ज होने पर ही आगे की जांच पूरी हो सकती है। तभी हमारे खिलाफ दर्ज झूठे मामले की सच्चाई सामने आएगी और इस कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलेगी। हम अदालत से निवेदन करते हैं कि इस प्रक्रिया में देरी न करें और तेजी से कार्रवाई करें, क्योंकि बहुत से लोग इसे देख रहे हैं।’UP Politics:

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