Political News: भारत और फ्रांस ने दोहरा कराधान बचाव करार (डीटीएसी) में संशोधन किया है। इसके तहत अब पूंजीगत लाभ पर कर कंपनी जहां स्थित है उसके आधार पर लगाया जाएगा। इसके साथ ही सबसे तरजीही देश (एमएफएन) प्रावधान को भी हटा दिया गया है जिससे कराधान व्यवस्था में अधिक स्पष्टता और निश्चितता आएगी। इस संशोधन से पहले जहां लाभांश से आय पर कर की दर 10 प्रतिशत यानी एक समान थी, उसमें अब बदलाव किया गया है। कम से कम 10 प्रतिशत पूंजी रखने वालों के लिए पांच प्रतिशत और अन्य सभी मामलों में अब 15 प्रतिशत कर लगेगा। Political News
इसमें ‘तकनीकी सेवाओं के शुल्क’ की परिभाषा को भारत-अमेरिका डीटीएए के अनुरूप किया गया है और ‘स्थायी प्रतिष्ठान’ (परमानेंट एस्टैब्लिशमेंट) के दायरे का विस्तार करते हुए ‘सर्विस पीई’ जोड़ा गया है। इन संशोधन पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की हालिया भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों की ओर से केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरपर्सन रवि अग्रवाल और भारत में फ्रांस के राजदूत थिएरी मथौ ने हस्ताक्षर किए। Political News
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संशोधित नियमों में सूचना के आदान-प्रदान के प्रावधानों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अद्यतन किया गया है और कर वसूली में सहयोग के लिए एक नया अनुच्छेद जोड़ा गया है। सीबीडीटी ने कहा कि इससे भारत और फ्रांस के बीच सूचना का निर्बाध आदान-प्रदान संभव होगा और आपसी कर सहयोग मजबूत होगा। किसी कंपनी के शेयरों की बिक्री से उत्पन्न पूंजीगत लाभ पर कराधान का पूरा अधिकार उस देश को होगा जहां कंपनी स्थित है। साथ ही सबसे तरजीही देश (एमएफएन) प्रावधान को हटा दिया गया है जिससे उससे जुड़े सभी विवादों का समाधान होगा। Political News
भारत-फ्रांस दोहरा कराधान बचाव समझौते (डीटीएसी) में संशोधन से जुड़े प्रावधान दोनों देशों के घरेलू कानूनों के तहत आंतरिक प्रक्रियाएं पूरी होने और आपसी सहमति की शर्तों के अधीन प्रभाव में आएंगे। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कहा, ‘‘ संशोधित नियम भारत-फ्रांस डीटीएसी को नवीनतम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अद्यतन करता है। यह संशोधन इस प्रकार किया गया है कि भारत और फ्रांस दोनों के हितों के बीच संतुलन बना रहे तथा समझौता वैश्विक मानकों के अनुरूप हो।’’ सीबीडीटी ने कहा कि यह संशोधन करदाताओं को अधिक कर-निश्चितता प्रदान करेगा और भारत तथा फ्रांस के बीच निवेश, प्रौद्योगिकी एवं पेशेवरों के आवागमन को बढ़ावा देगा। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।
