Delhi: संसद की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने लोकसभा में अपनी सीटों से खड़े होकर एफसीआरए बिल वापस लेने के जोरदार नारे लगाए – स्पीकर ओम बिरला ने सदन को शांत रहने की अपील की, लेकिन विपक्ष नहीं माना।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि बिल पर गलतफहमी फैलाई जा रही है।
रिजिजू ने दावा किया कि यह बिल किसी धर्म या संगठन के खिलाफ नहीं है, बल्कि विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग को रोकने और राष्ट्रीय हित में पारदर्शिता लाने के लिए है।रिजिजू ने कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी पर केरल में लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया।हालांकि हंगामा नही थमा और लोकसभा की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। वही कार्यवाही शुरू होने से पहले संसद परिसर में भी कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने मकर द्वार पर जोरदार प्रदर्शन किया।
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कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने बिल को “असंवैधानिक” और “अल्पसंख्यक विरोधी” बताया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक एनजीओ, चर्च, स्कूल-हॉस्पिटल और अल्पसंख्यक संस्थाओं पर सरकार का अत्यधिक नियंत्रण बढ़ाएगा।
विपक्ष का आरोप है कि बिल में विदेशी फंड से बने एसेट्स को सरकारी नियंत्रण में लेने का प्रावधान है, जो “खतरनाक” है।वही राज्यसभा में भी एफसीआरए बिल और अन्य मुद्दों पर सरकार-विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विपक्ष ने बिल को अल्पसंख्यकों तथा सिविल सोसाइटी के खिलाफ बताया।सरकार का कहना है कि संशोधन विदेशी फंडिंग की पारदर्शिता बढ़ाने और जबरन धर्मांतरण या राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को रोकने के लिए जरूरी है।
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बिल में एफसीआरए लाइसेंस रद्द होने पर विदेशी योगदान से बने एसेट्स को नियंत्रित करने का प्रावधान है।विपक्ष का पक्ष: कांग्रेस और वाम दल इसे अल्पसंख्यक संस्थाओं, एनजीओ और सामाजिक कार्यों पर हमला बता रहे हैं। खासकर केरल विधानसभा चुनावों के मद्देनजर चर्च और अल्पसंख्यक समुदायों में इस बिल को लेकर आशंका है।फिलहाल सरकार ने लोकसभा में एफसीआरए संशोधन बिल पर चर्चा और पास करने का कार्यक्रम टाल दिया है। संसद में हंगामा जारी है और यह मुद्दा आगे भी गरमा सकता है। इस बिल पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है।
