Jammu and Kashmir: पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में मारे गए स्थानीय पोनी वाले आदिल हुसैन शाह के परिवार को आज भी हर पल उनकी कमी खलती है। आदिल, अपने परिवार के सबसे बड़े बेटे और एकमात्र कमाने वाले थे, जो पहलगाम में अपने घोड़े पर सैलानियों को सैर करवाते थे। लेकिन पिछले साल 22 अप्रैल को हमले के दौरान पर्यटकों को बचाने की कोशिश में उनकी जान चली गई।Jammu and Kashmir
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आदिल की पत्नी गुलनाज अख्तर के लिए, इस दर्द से उबरना नामुमकिन सा हो गया है। शायद यही वजह है कि उन्होंने इस दर्द के साथ ही जीना सीख लिया है। सरकार द्वारा दी गई नौकरी के जरिए वो अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा कर पा रही हैं।अपने पति को खोने के गम से पहले से ही टूट चुकी गुलनाज की तकलीफ अपनी नन्ही बेटी को खोने के बाद और भी बढ़ गई है।Jammu and Kashmir
आदिल के पिता का दर्द भी कुछ कम नहीं है। बेटे की याद उन्हें आज भी सताती है। जब कश्मीर में सैलानियों के आने का मौसम होता है तो उनकी तकलीफ और बढ़ जाती है, उन्हें याद आता है वो सफर जो वो अपने बेटे साथ पहलगाम तक तय करते थे। आदिल के भाई भी इस सदमे से उबरने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, सरकार से उन्हें भी नौकरी मिली है।
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वैसे परिवार वालों को इस बात पर गर्व है कि उनके बेटे ने दूसरों की जान बचाने में उनकी मदद की। आदिल के परिवार को सरकार से करीब 15 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी मिली थी। महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी अपने प्रतिनिधि भेजे और परिवार के लिए घर बनवाने में मदद की। आदिल की पत्नी अब अपने माता-पिता के साथ रहती हैं। उनका कहना है कि अपने पति के साथ बिताए गए पलों की यादें उस घर में उन्हें परेशान करती हैं।Jammu and Kashmir
