ECI: वर्ष 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अब तक का सर्वाधिक 92.47 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया और इसी के साथ भाजपा-तृणमूल के बीच की जंग और रोचक हो गई है।पश्चिम बंगाल में बुधवार को विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में 91.66 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया।इसके दूरगामी परिणाम सामने आने की संभावना है। ऐसे में देखना यह है कि क्या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपना वर्चस्व बरकरार रख पाएंगी या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दबदबे को समाप्त कर देगी। मतदान बंद होने तक 91.66 प्रतिशत मतदान हो चुका था और खबरों के मुताबिक लाखों मतदाता अब भी अपने मत डालने के लिए कतारों में इंतजार कर रहे थे। दक्षिण बंगाल की 142 विधानसभा सीटों पर हुए दूसरे चरण के मतदान में पहले चरण के रिकॉर्ड 93.19 प्रतिशत मतदान की बराबरी होने की संभावना थी। ECI:
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कोलकाता में लगभग 87 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि पूर्वी बर्धमान जिला 92.46 प्रतिशत मतदान के साथ शीर्ष पर रहा।निर्वाचन आयोग की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया है कि दूसरे चरण के मतदान में शाम 7.45 बजे तक 91.66 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिससे दोनों चरणों को मिलाकर कुल मतदान प्रतिशत 92.47 प्रतिशत हो गया है। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को हुआ था और मतगणना चार मई को होगी।पश्चिम बंगाल में स्वतंत्रता के बाद मत प्रतिशत के लिहाज से यह अब तक का सबसे अधिक भागीदारी वाला विधानसभा चुनाव है।भागीदारी के विशाल पैमाने ने चुनाव के बारे में तत्काल एक राजनीतिक संदेश दिया- मतदाता उदासीन नहीं थे। वे इतनी बड़ी संख्या में मतदान करने पहुंचे थे कि हर बात पर सवाल उठने लगे और हर दावे में राजनीतिक रंग भर गया।ECI:
यदि पहले चरण में यह परखा गया कि क्या भाजपा उत्तर बंगाल में अपने गढ़ को बरकरार रख सकती है, तो दूसरा और अंतिम चरण भाजपा के लिए असली लड़ाई थी कि क्या वह सत्तारूढ़ टीएमसी के दक्षिणी गढ़ कोलकाता, हावड़ा, हुगली, नादिया, उत्तर और दक्षिण 24 परगना और पूर्वी बर्धमान में सेंध लगा सकती है।इस व्यापक राजनीतिक संघर्ष के केंद्र में भवानीपुर था, जो अब केवल दक्षिण कोलकाता का निर्वाचन क्षेत्र नहीं था, बल्कि बनर्जी का राजनीतिक गढ़, उनका भावनात्मक गृह क्षेत्र और भाजपा का चुना हुआ मनोवैज्ञानिक युद्धक्षेत्र था।बनर्जी (71) 15 वर्षों के शासन के बाद लगातार चौथी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही हैं और उनका मुकाबला नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी से है।ECI:
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इस प्रतिष्ठा की लड़ाई को सांकेतिक रूप से नंदीग्राम के पुनर्मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है, जहां 2021 में टीएमसी से भाजपा में शामिल होने के बाद अधिकारी ने बनर्जी को हराया था। पांच साल बाद यह मुकाबला बनर्जी के गढ़ में आ गया है। टीएमसी के लिए भवानीपुर सीट बरकरार रखना मुख्यमंत्री के अपने गढ़ में उनके अधिकार की रक्षा करने जैसा है।बीजेपी के लिए, इस गढ़ को भेदना बंगाल की सबसे शक्तिशाली राजनीतिक हस्ती के इर्द-गिर्द मंडरा रही उसकी अजेयता की छवि को धूमिल करने के बराबर होगा। इस निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 87 प्रतिशत मतदान हुआ, जो 2021 के विधानसभा चुनावों में लगभग 61 प्रतिशत और उस उपचुनाव के 57 प्रतिशत मतदान से काफी अधिक है, जिसके बाद बनर्जी विधानसभा में वापस आईं।बनर्जी ने बीजेपी पर केंद्रीय बलों, पुलिस पर्यवेक्षकों और निर्वाचन अधिकारियों का इस्तेमाल करके चुनाव में धांधली करने का आरोप लगाया।उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘भाजपा इस चुनाव में धांधली करना चाहती है। बंगाल में चुनाव आमतौर पर शांतिपूर्ण होते हैं। क्या यहां गुंडा राज है?’’उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान मंगलवार देर रात तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के घरों में घुस गए और इलाके में दहशत फैला दी।ECI:
बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव पर्यवेक्षक भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं और दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जिलों में चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।अधिकारी ने इन आरोपों को ‘‘हताशा’’ का संकेत बताते हुए खारिज कर दिया और दावा किया कि बनर्जी को यह एहसास हो गया है कि उन्हें ‘‘एक भी वोट’’ नहीं मिलने वाला है। बनर्जी आमतौर पर अपना वोट डालने के लिए दिन में देर से कालीघाट स्थित अपने आवास से निकलकर मित्रा इंस्टीट्यूशन स्कूल जाती हैं। इस बार वह सुबह आठ बजे से पहले ही मतदान केंद्र पहुंच गईं।उन्होंने चेतला, पद्मपुकुर और चक्रबेड़िया का दौरा किया, जिससे भवानीपुर और दक्षिण बंगाल की व्यापक चुनावी लड़ाई के महत्व का पता चलता है। बाद में कालीघाट क्षेत्र में उस वक्त तनाव फैल गया जब अधिकारी एक मतदान केंद्र पर पहुंचे और तृणमूल कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ नारे लगाए जिसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप किया।ECI:
विपक्ष के नेता ने निर्वाचन आयोग से अतिरिक्त केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग करते हुए शिकायत दर्ज कराई। सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया। अधिकारी ने आरोप लगाया कि वे ‘‘बाहरी लोग हैं जो चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं’’।कोलकाता के एंटाली में भाजपा उम्मीदवार प्रियंका तिबरेवाल ने आरोप लगाया कि बूथ के अंदर अत्यधिक भीड़ और मतदाताओं की निजता के उल्लंघन पर आपत्ति जताने के बाद टीएमसी के मतदान एजेंटों ने उन पर हमला करने की कोशिश की।पनिहाटी में बीजेपी उम्मीदवार और आर जी कर हत्याकांड की पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ को विरोध का सामना करना पड़ा, जबकि बसंती में उनके पार्टी सहयोगी बिकाश सरदार ने आरोप लगाया कि ‘200 से 250 की संख्या में टीएमसी के गुंडों’ ने उनके वाहन पर हमला किया और उनके चालक के साथ मारपीट की।इस बीच, टीएमसी ने केंद्रीय बलों पर फाल्टा के बेलसिंघा गांव में आम मतदाताओं, विशेषकर महिलाओं पर बर्बरतापूर्ण बल प्रयोग करने का आरोप लगाया।ECI:
टीएमसी ने आरोप लगाया कि मतदान केंद्र के पास भीड़ को तितर-बितर करने के प्रयास के दौरान महिलाओं की पिटाई की गई। पार्टी ने हावड़ा के साथछिया में महिलाओं और एक चार वर्षीय बच्चे के साथ-साथ पूर्वी बर्धमान जिले के औसग्राम में ग्रामीणों के साथ सीएपीएफ द्वारा बर्बरता किये जाने का आरोप लगाया।पार्टी प्रवक्ता अनिर्बन बनर्जी ने कहा, ‘‘सुरक्षा सुनिश्चित करने के नाम पर केंद्रीय बल के जवान महिलाओं को भी नहीं बख्श रहे हैं, जिन पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया गया। टीएमसी निहत्थे ग्रामीणों पर बर्बरतापूर्ण बल प्रयोग करने वाले पुरुष जवानों की इस बर्बरता का विरोध करती है। हम सीएपीएफ की ऐसी अवैध कार्रवाइयों की ओर निर्वाचन आयोग का ध्यान आकर्षित करते हैं और चुनाव निकाय से इस तरह के बल प्रयोग के खिलाफ निषेधाज्ञा जारी करने का अनुरोध करते हैं। हमारा मानना है कि बंगाल की जनता ईवीएम के माध्यम से इसका जवाब देगी।’’ECI:
बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि फाल्टा के कई मतदान केंद्रों में ईवीएम के बटनों पर टेप लगाकर पार्टी के लिए वोट डालने का विकल्प अवरुद्ध कर दिया गया था, और प्रभावित बूथों पर पुनर्मतदान की मांग की। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने कहा कि जिन बूथों पर ईवीएम से छेड़छाड़ पाई गई है, वहां पुनर्मतदान की घोषणा किए जाने की संभावना है।हालांकि उन्होंने कहा कि यह आदेश जिला निर्वाचन अधिकारी या चुनाव पर्यवेक्षकों से ईवीएम से छेड़छाड़, जैसे कि टेप का उपयोग या स्याही का धब्बा लगाने के आरोपों के संबंध में रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही जारी किया जाएगा। बुधवार को जिन 142 सीटों के लिए मतदान हुआ उनमें से टीएमसी ने 2021 में 123 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा को केवल 18 और आईएसएफ को एक सीट मिली थी। उत्तर और दक्षिण 24 परगना, कोलकाता और हावड़ा मिलकर बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में 91 सीट का योगदान करते हैं, जो सदन का लगभग एक तिहाई हिस्सा है।इस दक्षिणी क्षेत्र में जीत हासिल किए बिना भाजपा के लिए नबन्ना पहुंचने का कोई वास्तविक रास्ता नहीं है।ECI:
टीएमसी के लिए भी गणित उतना ही स्पष्ट है: दक्षिण बंगाल में जीत हासिल कर लें, तो ममता बनर्जी के लगातार चौथी बार सत्ता में आने का रास्ता खुला रहेगा। भारी मतदान ने दोनों खेमों को राजनीतिक हथियार मुहैया करा दिए।टीएमसी के लिए, इससे संकेत मिला कि भ्रष्टाचार के आरोपों, भर्ती घोटालों, सत्ता-विरोधी लहर और शासन व्यवस्था पर लगातार हमलों के बावजूद बनर्जी की कल्याणकारी नीतियां, महिला-केंद्रित योजनाएं और व्यक्तिगत जुड़ाव बरकरार हैं।बीजेपी के लिए, इसी तरह के मतदान ने सत्ताधारी शासन के खिलाफ मौन आक्रोश, टीएमसी विरोधी वोटों के एकीकरण और बदलाव के लिए संभावित जनादेश को दर्शाया। लेकिन, मतदान के बढ़ते आंकड़ों के पीछे चुनाव का सबसे गहरा पहलू छिपा था – मतदाता सूचियों का विशेष गहन संशोधन (एसआईआर), जिसके तहत राज्य भर में 90.83 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए, जो लगभग 12 प्रतिशत मतदाताओं के बराबर थे। इससे एक भी वोट पड़ने से पहले ही बंगाल का राजनीतिक नक्शा पूरी तरह से बदल गया।इस प्रक्रिया के कारण मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 6.77 करोड़ हो गई, जिससे मतदान के आंकड़ों में सांख्यिकीय और राजनीतिक दोनों आयाम जुड़ गए। कुल पात्र मतदाताओं की संख्या कम होने से मतदान प्रतिशत बढ़ गया। दक्षिण बंगाल में मतदान से पहले लाखों नाम हटा दिए गए थे।इसके तहत उत्तर 24 परगना में 12.6 लाख से अधिक, दक्षिण 24 परगना में 10.91 लाख, कोलकाता में लगभग 6.97 लाख और हावड़ा में लगभग छह लाख लोग मतदाता सूची से बाहर हो गए। कम से कम 25 निर्वाचन क्षेत्रों में हटाए गए नामों की संख्या पिछली जीत के अंतर से अधिक है।ECI:
