दिल्ली सरकार ने ‘दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति-2026’ बुधवार को अधिसूचित की। इस नीति का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को तेजी से अपनाने को बढ़ावा देना, वायु गुणवत्ता में सुधार करना और इलेक्ट्रिक परिवहन के लिए अनुकूल परिवेश विकसित करना है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता वाले दिल्ली मंत्रिमंडल ने सोमवार को इस EV नीति को मंजूरी दी थी। इसके बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए उप-राज्यपाल तरणजीत सिंह संधू के पास भेजा गया था। अधिसूचना में कहा गया, ‘‘…मोटर वाहन अधिनियम, 1988 तथा उसके तहत बनाए गए नियमों के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के उप-राज्यपाल एक जुलाई, 2026 से प्रभावी दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2026 अधिसूचित करते हैं।’’
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दिल्ली सरकार ने नई EV नीति के तहत राष्ट्रीय राजधानी में 30 लाख रुपये या उससे कम एक्स-शोरूम कीमत वाली सभी पंजीकृत इलेक्ट्रिक कारों को सड़क कर और पंजीकरण शुल्क में पूर्ण छूट देने की घोषणा की है। इसके अलावा, एक जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा का ही पंजीकरण किया जाएगा। वहीं, नए पेट्रोल और सीएनजी दोपहिया वाहनों का पंजीकरण चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाएगा और एक अप्रैल, 2028 से केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का ही पंजीकरण होगा।
नई नीति के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने वालों को पहले वर्ष 30,000 रुपये, दूसरे वर्ष 20,000 रुपये और तीसरे वर्ष 10,000 रुपये की सब्सिडी मिलेगी। यह नीति 31 मार्च, 2030 तक प्रभावी रहेगी। राज्य सरकार अगले चार वर्षों में इलेक्ट्रिक परिवहन को बढ़ावा देने और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए लगभग 15,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। साथ ही राष्ट्रीय राजधानी में 30,000 से अधिक EV चार्जिंग प्वाइंट स्थापित किए जाएंगे।
