Delhi: कांग्रेस ने जाति जनगणना को दिखावा और धोखाधड़ी बताकर बड़ा विवाद छेड़ दिया है।कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने जाति जनगणना को लेकर कमियां गिनाते हुए बड़े आरोप लगाए है।जयराम रमेश ने पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र का हवाला देकर मांग की है कि राष्ट्रीय स्तर पर जातिगत जनगणना का तरीका वही होना चाहिए, जो बिहार और तेलंगाना की सरकारों ने अपनाया है।Delhi:
Read Also- महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा, टैक्सी ड्राइवरों की रोजी रोटी पर मंडराया संकट, सरकार बोली- मराठी हमारी पहचान…
जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। जयराम रमेश ने जानकारी दी कि 20 अगस्त को मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को एक संयुक्त पत्र भेजा है। कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री को लिखा गया यह तीसरा पत्र है, क्योंकि इससे पहले खड़गे द्वारा भेजे गए दो पत्रों का सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं आया था।
जयराम रमेश ने कहा कि जातिगत जनगणना कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश के भविष्य और संविधान की प्रस्तावना में निहित ‘सामाजिक न्याय’ से जुड़ा एक संवैधानिक मुद्दा है। सटीक आंकड़ों के बिना सामाजिक न्याय और आरक्षण की नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा सकता”जयराम रमेश ने याद दिलाया कि अप्रैल 2024 में प्रधानमंत्री ने जाति जनगणना की मांग को ‘अर्बन नक्सल’ सोच बताया था।हालांकि, बाद में सरकार ने यू-टर्न लेते हुए जाति जनगणना कराने का ऐलान किया। लेकिन 14 अगस्त को जारी 40 प्रश्नों की प्रश्नावली के प्रश्न संख्या 10 में जिस तरह से जाति का कॉलम रखा गया है, उससे स्पष्ट है कि सरकार इस प्रक्रिया को केवल एक औपचारिकता बना रही है।Delhi:
Read Also- महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा, टैक्सी ड्राइवरों की रोजी रोटी पर मंडराया संकट, सरकार बोली- मराठी हमारी पहचान…
कांग्रेस का आरोप है कि जनगणना में खुले प्रश्नों (Open-ended questions) का विकल्प रखना प्रक्रिया को बेकार करने जैसा है। भारत में एक ही जाति को अलग-अलग राज्यों और भाषाओं में विभिन्न नामों और उप-जातियों से जाना जाता है। यदि ओपन-एंडेड विकल्प दिया गया, तो एक ही जाति हजारों नामों में बंट जाएगी और देश में लाखों जातियों के आंकड़े निकल आएंगे, जिससे पूरा डेटा निरर्थक हो जाएगा।
कांग्रेस की मुख्य मांगें: ड्रॉप-डाउन फॉर्मेट: जनगणना में खुले प्रश्न की जगह ड्रॉप-डाउन (Drop-down) फॉर्मेट का इस्तेमाल हो, जैसा बिहार जाति सर्वेक्षण और तेलंगाना में किया गया था।ओबीसी शब्द का समावेश: मौजूदा फॉर्मेट में ‘पिछड़ा वर्ग’ (Backward Class) शब्द गायब है, जिससे सही आबादी का आंकलन असंभव है। सर्वदलीय बैठक: गृह मंत्रालय इस प्रश्नावली को वापस ले, सभी राजनीतिक दलों, राज्यों और विशेषज्ञों से चर्चा कर नई प्रश्नावली तैयार करे। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि 2027 की राष्ट्रीय जनगणना शुरू होने में अभी कुछ महीनों का समय बाकी है, इसलिए सरकार के पास इस फॉर्मेट को सुधारने का पूरा मौका है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह वर्तमान रूप में इस “आईवॉश” या “व्हाइटवॉश” जनगणना को स्वीकार नहीं करेगी।बहरहाल जातिगत जनगणना के डेटा और उसकी सटीकता को लेकर छिड़ी यह बहस आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकती है। Delhi:
