Navratri 2026: नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की उपासना का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, जिस कारण इन्हें ‘चंद्रघंटा’ कहा जाता है। माता का यह रूप साहस, पराक्रम, और मानसिक शांति प्रदान करने वाला माना जाता है।
किस रूप की होती है पूजा?
देवी चंद्रघंटा का वाहन शेर है। उनके 10 हाथों में त्रिशूल, गदा, तलवार, धनुष-बाण, कमल और कमंडल जैसे अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां चंद्रघंटा की पूजा करने से भक्तों के मन का भय और तनाव दूर होता है, तथा साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। Navratri 2026
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कैसे करें पूजा ?
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें। मां के सामने शुद्ध घी या तेल का दीपक जलाएं। माता को रोली, अक्षत, सिंदूर, लाल चुनरी और लाल या पीले फूल अर्पित करें। मां चंद्रघंटा को दूध, केसर युक्त खीर या दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है। मूल मंत्र: ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः। दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और अंत में कपूर से आरती करके शंख-घंटा बजाएं।
क्या करना चाहिए ?
घर में शांति और सात्विक वातावरण बनाए रखें। जरूरतमंदों को फल, दूध या अन्न का दान करें। मन में शुद्ध और दयालु विचार रखें। समय मिलने पर माता के नाम का ध्यान करें। Navratri 2026
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क्या नहीं करना चाहिए ?
लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा या बासी भोजन का सेवन न करें। किसी से विवाद न करें और न ही किसी के प्रति कड़वे शब्द बोलें। व्रत/पूजन के दिनों में नाखून, बाल या दाढ़ी काटने से परहेज किया जाता है। बिना स्नान किए या गंदे कपड़ों में पूजा स्थल को स्पर्श न करें। Navratri 2026
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