POLITICS: परिसीमन संशोधन बिल पर सियासत तेज़; केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने मल्लिकार्जुन खरगे को लिखा कड़ा पत्र

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POLITICS: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष ​मल्लिकार्जुन खरगे के पीएम को सर्वदलीय बैठक की मांग वाले पत्र का जवाब दिया है। जवाब में रिजिजू ने कहा कि संसद सत्र के सत्रावसान (प्रोरोगेशन) को लेकर कोई संवैधानिक बाध्यता या समयसीमा तय नहीं है। साथ ही रिजिजू ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी ने चर्चा के लिए बार-बार अनुरोध के बावजूद कोई तारीख तय नहीं की है। POLITICS

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​संसद में परिसीमन संशोधन बिल (Delimitation Amendment Bill) और सर्वदलीय बैठक की मांग को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच ठन गई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पत्र का जवाब देते हुए एक विस्तृत पत्र जारी किया है। केंद्रीय संसदीय मंत्री ​”किरेन रिजिजू ने अपने पत्र में मल्लिकार्जुन खरगे के उस आरोप का जवाब दिया है, जिसमें संसद का सत्रावसान न होने को लेकर सवाल उठाए गए थे। POLITICS

रिजिजू ने स्पष्ट किया है कि संसद के सत्रावसान के बीच की अवधि को लेकर कोई संवैधानिक अनिवार्यता नहीं है।रिजिजू ने अतीत के कई उदाहरण देते हुए बताया कि साल 2008, 1987, और 1989 जैसे कई मौकों पर सदन लंबे समय तक बिना सत्रावसान के बिना भी संचालित होते रहे हैं। ​इसके साथ ही, परिसीमन संशोधन बिल पर सरकार के रुख को साफ करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा है कि सरकार ने लगातार विपक्ष के सहयोग की मांग की है। POLITICS

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लिखा कि सरकार ने प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के साथ कई बार संपर्क साधा— खुद उन्होंने 16 मार्च, 26 मार्च और 12 अप्रैल 2026 को पत्र लिखकर चर्चा की थी। इसके अलावा डीएमके, सपा, एनसीपी, शिवसेना, और बीजेडी जैसे अन्य विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों के साथ भी संवाद स्थापित किया गया था।POLITICS

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किरेन ​रिजिजू ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी की ओर से चर्चा के लिए कोई तारीख या समय नहीं दिया गया, जिसके बाद सरकार ने अन्य विपक्षी दलों तक अपनी पहुंच बढ़ाई। अंत में, सरकार ने अपील की है कि अब बहस या मांग को दोहराने के बजाय राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर रचनात्मक सहयोग दिया जाना चाहिए।” POLITICS 

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