CJP नेताओं को दिल्ली हाई कोर्ट की फटकार, सौरव दास और आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका

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CJP- जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने संगठन के उद्देश्य और शांति व्यवस्था पर उठाए सवाल, विदेशों में छात्र आंदोलनों के हिंसा में बदलने का भी किया जिक्र….

News Desk : दिल्ली हाई कोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत बढ़ाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने सुनवाई के दौरान दोनों नेताओं से उनकी उम्र, संगठन के उद्देश्य और प्रदर्शन के दौरान शांति व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को लेकर सवाल किए। अदालत ने कहा कि जब शांति भंग होने की आशंका हो, तब संगठन की भूमिका और उसके उद्देश्य को समझना जरूरी है। कोर्ट की सलाह के बाद दोनों नेताओं ने अपनी याचिका वापस लेने का फैसला किया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

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सुनवाई के दौरान पीठ ने CJP के स्वरूप और उसके उद्देश्यों को लेकर भी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि संगठन वही है, लेकिन उसके मकसद में बदलाव दिखाई दे रहा है। पीठ ने याद दिलाया कि पहले प्रदर्शन में छात्र भी शामिल थे, लेकिन अब आंदोलन के उद्देश्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सौरव दास की उम्र 27 साल और आशुतोष रांका की उम्र 32 साल बताए जाने पर अदालत ने उनसे पूछा कि क्या वे Gen Z की श्रेणी में आते हैं। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी कहा कि विदेशों में ऐसे उदाहरण देखे गए हैं, जहां छात्र आंदोलन बाद में आगजनी और इमारतों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाओं में बदल गए। ये टिप्पणियां सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से व्यक्त की गई चिंताओं का हिस्सा थीं।

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याचिका में दोनों नेताओं की ओर से दलील दी गई कि स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के 19 अक्टूबर के आदेश में भविष्य में शांति भंग होने की आशंका के आधार को स्पष्ट नहीं किया गया। इस पर अदालत ने कहा कि रिट याचिका में न्यायिक समीक्षा का दायरा और अपील में तथ्यों के मूल्यांकन का दायरा अलग होता है। पीठ ने यह भी पूछा कि जब संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने सुनवाई होनी है, तो हाई कोर्ट में तत्काल याचिका लाने की जरूरत क्या थी। अदालत की सलाह पर सौरव दास और आशुतोष रांका के वकील अभिक चिमिनी ने याचिका वापस लेने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं ने मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई के बाद आगे की कानूनी रणनीति तय करने का फैसला किया।CJP

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