Raipur: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से छत्तीसगढ़ नक्सलवाद के खतरे से मुक्त होकर अब तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है। बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित ‘बस्तर दशहरा’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी युवा देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में सक्रिय रूप से भाग लेंगे।
Read Also: त्रिपुरा के युवक के साथ नस्लीय टिप्पणी करने वाला आरोपी गिरफ्तार, आमिर शौकीन के रूप में हुई….
राष्ट्रपति मुर्मू ने पेड़-पौधों को “जीवित देवता” बताया और लोगों से वनों की रक्षा करने और अधिक से अधिक पेड़ लगाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ये जीवन को बनाए रखने के लिए जरूरी चीजें प्रदान करते हैं। राष्ट्रपति ने कहा, “छत्तीसगढ़ लंबे समय तक नक्सलवाद की समस्या से जूझता रहा। केंद्र और राज्य के संयुक्त प्रयासों से छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद के खतरे से मुक्त किया गया है और अब यह तेजी से प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है।”
Read Also: Delhi: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन के चलते चुनाव आयोग कार्यालय और बंगला साहिब के आसपास बढ़ाई गई सुरक्षा
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि नक्सली हिंसा के दर्द को पीछे छोड़कर छत्तीसगढ़ तेजी से तरक्की कर रहा है।उन्होंने कहा, “आज छत्तीसगढ़ के सामने विकास के कई रास्ते खुल रहे हैं, इसके लिए मैं केंद्र और राज्य को बधाई देती हूं। मुझे बताया गया है कि आदिवासी उद्यमियों को वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराने और उन्हें बाजारों से जोड़ने के प्रयासों में तेजी लाई गई है।”
उन्होंने विश्वास जताया कि इन प्रयासों से समान विकास के जरिए 2047 तक एक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।राष्ट्रपति ने कहा, “आदिवासी युवा देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में सक्रिय रूप से योगदान देंगे।” यह बताते हुए कि एक पेड़ को बड़ा होने में कई साल लग जाते हैं, उन्होंने कहा कि लोगों को न केवल पेड़ों की पूजा करनी चाहिए, बल्कि उन्हें लगाने और उनकी देखभाल करने की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “जहां कुछ परंपराओं में पत्थरों और मिट्टी की मूर्तियों की पूजा की जाती है, वहीं आदिवासी समुदाय जीवित पेड़-पौधों की पूजा करते हैं, जो जीवन देने वाले हैं। वे हमें पानी, हवा, भोजन और जीवित रहने के लिए जरूरी हर चीज प्रदान करते हैं।”राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि भले ही लोग ईश्वर को न देख पाएं, लेकिन वे उन पेड़-पौधों को देख सकते हैं जो फल, फूल और औषधियां देकर जीवन को बनाए रखते हैं। इस अर्थ में, पेड़-पौधे वास्तव में हमारे जीवित देवता हैं।
उन्होंने कहा, “जंगलों में मौजूद पेड़-पौधे प्रकृति और ईश्वर का उपहार हैं। हमें अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए इनका उपयोग करने का अधिकार है, लेकिन यह हमारा कर्तव्य भी है कि हम जो कुछ भी लें, उसकी भरपाई करें, जंगलों को बचाएं और पहाड़ियों व पर्वतों की रक्षा करें।”राष्ट्रपति ने आदिवासी समुदायों और समाज के सभी वर्गों के लोगों से आग्रह किया कि वे कृषि भूमि, बंजर जमीन और अन्य उपलब्ध खुली जगहों पर पेड़ लगाएं।उन्होंने कहा, “हमें पेड़-पौधों की पूजा करनी चाहिए और अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पृथ्वी हरी-भरी और समृद्ध बनी रहे। हमें इसे हासिल करने के लिए सामूहिक संकल्प लेना चाहिए।”
