BRICS-नई दिल्ली में दो दिवसीय सम्मेलन का समापन, आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने पर जोर
News Desk : नई दिल्ली के संविधान सदन में आयोजित 12वें BRICS संसदीय फोरम का मंगलवार को समापन हो गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में 26 और 27 अक्टूबर को हुए इस दो दिवसीय सम्मेलन में सदस्य और साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधियों ने वैश्विक चुनौतियों, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और जन-केंद्रित विकास पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन के अंत में संयुक्त घोषणापत्र को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। इस मंच का मुख्य विषय संसदों को जन-केंद्रित विकास के लिए मजबूत बनाना था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सम्मेलन के दौरान विभिन्न देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों से बातचीत की। सम्मेलन में संस्थागत मजबूती, नवाचार, सहयोग और सतत विकास जैसे मुद्दों पर विशेष चर्चा हुई।BRICS
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संयुक्त घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग, वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए साझा प्रयासों पर जोर दिया गया। भारत की प्राथमिकताओं में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और ग्लोबल साउथ के देशों की भागीदारी को मजबूत करना प्रमुख रहा। आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी सहयोग, आतंकी वित्तपोषण पर रोक और इस चुनौती से निपटने में दोहरे मानदंडों से बचने जैसे मुद्दे भी भारत के कूटनीतिक एजेंडे का हिस्सा रहे। सम्मेलन के दौरान ओम बिरला ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान संवाद, कूटनीति और आपसी सहयोग से तलाशना चाहिए। उन्होंने संसदों से पारदर्शिता, जवाबदेही और जनविश्वास को मजबूत करने की अपील की। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया, ताकि संसदीय कामकाज अधिक प्रभावी और नागरिकों के प्रति जवाबदेह बन सके।BRICS
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ओम बिरला ने कहा कि BRICS की सफलता केवल सदस्य देशों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसके परिणामों से पूरी मानवता और खासकर ग्लोबल साउथ के देशों को लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने संसदीय संवाद के जरिए आपसी विश्वास बढ़ाने और साझा वैश्विक चुनौतियों के शांतिपूर्ण समाधान की जरूरत पर जोर दिया। सम्मेलन के समापन के साथ BRICS संसदीय फोरम की अध्यक्षता 2027 के लिए चीन को सौंप दी गई। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न देशों की संसदों के बीच सहयोग बढ़ाना और साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाना रहा। संयुक्त घोषणापत्र को सर्वसम्मति से स्वीकार किया जाना सम्मेलन का प्रमुख परिणाम रहा, जबकि अब इसकी प्रतिबद्धताओं को ठोस कदमों में बदलना सदस्य देशों के लिए अहम होगा।
