AAP: आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका-राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों ने बीजेपी में विलय…

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AAP:  आम आदमी पार्टी को आज उसका सबसे बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के प्रमुख चेहरा और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संदीप पाठक और मुकेश मित्तल समेत कुल 7 सांसदों के साथ भाजपा में विलय का औपचारिक ऐलान कर दिया है। यह ऐलान पंजाब की आगामी 2027 विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आया है, जो AAP के लिए न सिर्फ संगठनात्मक, बल्कि नैतिक और राजनीतिक संकट का संकेत है।राघव चड्ढा, जो कभी अरविंद केजरीवाल के सबसे विश्वसनीय लेफ्टिनेंट माने जाते थे, ने कहा कि AAP में आंतरिक लोकतंत्र की कमी, नेतृत्व की एकतरफा कार्यशैली और पंजाब के मुद्दों पर पार्टी की नाकामी के चलते उन्होंने यह कदम उठाया है।AAP: 

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इसके साथ ही संदीप पाठक आईआईटी प्रोफेसर और राज्यसभा सांसद और मुकेश मित्तल सहित सात सांसद जिनमें ज्यादातर पंजाब से हैं शामिल हुए हैं। AAP के पास फिलहाल राज्यसभा में 10 और लोकसभा में 3 सांसद हैं – इस टूट से पार्टी की संसदीय ताकत करीब दो-तिहाई प्रभावित हो गयी है।वही आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इस बड़ी टूट के बाद जोरदार हमला बोलते हुए बीजेपी पर ऑपरेशन लोटस का आरोप लगाते हुए कहा कि पंजाब की जनता इसका जवाब देगी। AAP: 

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बहरहाल यह घटना AAP के लिए ‘ऑपरेशन लोटस’ का क्लासिक केस है। पिछले दिनों राघव चड्ढा को पार्टी के डिप्टी लीडर पद से हटाया गया था, तब राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि उन्हें संसद में बोलने से रोकने के लिए कार्रवाई की गई है वही आम आदमी पार्टी ने कहा था कि उन्हें “बीजेपी के खिलाफ बोलने से डर लगता है।आज का ऐलान साबित करता है कि AAP में पंजाब यूनिट में गहरी दरार थी। आज के घटनाक्रम का पंजाब में गहरा राजनीतिक असर पड़ने की संभावना है।2022 में AAP ने पंजाब में भारी जीत हासिल की थी। अब 2027 चुनाव से पहले सात सांसदों ज्यादातर पंजाब से है का जाना पार्टी को हिला सकता है। पंजाब AAP की सबसे मजबूत स्टेट यूनिट है – यह टूट सीटें और वोट बैंक दोनों प्रभावित करेगी।  AAP: 

वही “अम आदमी” की पार्टी अब “टूटती हुई पार्टी” के रूप में दिख रही है। दिल्ली, गुजरात, हरियाणा जैसे राज्यों में भी इसका असर पड़ेगा। केजरीवाल की गिरफ्तारी के घटनाक्रम से पहले ही पार्टी संघर्ष कर रही थी, अब यह आंतरिक विद्रोह घातक साबित हो सकता है।वही इस घटनाक्रम से बीजेपी बिना ज्यादा मेहनत के पंजाब में पैठ बना रही है। राघव चड्ढा ने पार्टी को तोड़कर अपनी ताकत बढ़ा ली है ,साथ ही उनका शिक्षित और सोशल मीडिया पर सक्रिय चेहरे के तौर पर दिखनाA BJP को “विकल्प” के रूप में पेश करने में मदद करेगा।AAP: 

यह घटनाक्रम राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता को भी झटका दे रहा है – INDIA गठबंधन पहले ही कमजोर था। ऐसे में इस घटनाक्रम से छोटी पार्टियों में टूट की चिंताएं बढ़ेगी वही क्या यह टूट AAP को पूरी तरह तोड़ देगी? या केजरीवाल इस संकट से उबरकर पार्टी को नई दिशा देंगे? राघव चड्ढा अब BJP में किस पद की मांग करेंगे – मंत्री, पंजाब प्रभारी या कुछ और? सवाल ये भी है कि बाकी बचे सांसद और विधायक कब तक टिक पाएंगे। कुल मिलाकर यह घटनाक्रम साबित करता है कि भारतीय राजनीति में व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और पार्टी अनुशासन के बीच टकराव हमेशा बना रहता है। AAP को लगा यह झटका कितना घातक साबित होगा – यह आने वाले दिनों और खासकर 2027 पंजाब चुनाव में तय होगा।  AAP: 

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