गुजरात के अमरेली जिले में महिलाएं बनी लखपति दीदी, सरकारी लोन ने बदली महिलाओं की आर्थिक तक़दीर

Amreli: गुजरात के अमरेली जिले के महज 900 आबादी वाले जिकियाली गांव की झंखनाबेन नसित ने मुश्किलों को अवसर में बदल डाला। वृद्ध ससुर के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी झंखना बहन और उनके पति पर आ गई। इसी दरम्यान उन्होंने डिजिटल युग की ताकत पहचानी और आत्मनिर्भरता की राह चुनी। Amreli: 

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गांव की सबसे कम उम्र की बहू झंखनाबेन ने घर से पापड़ बनाकर इसकी शुरुआत की। सरकारी लोन और मेहनत के दम पर उन्होंने अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया और वो लखपति दीदी बन गईं। आज वे 150 से अधिक प्रकार के उत्पाद तैयार कर रही हैं।लखपति दीदी के उत्पाद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए पूरे देश में पहुंच रहे हैं।Amreli: 

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इतना ही नहीं, इन्होंने सखी मंडल बनाकर बाकी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाया। इनके सखी मंडल के जरिए जिकयाली गाँव में 8–10 महिलाएं काम कर रही हैं। वहीं 12 किलोमीटर दूर समढियाला गांव में दूसरी बहनों ने पानीपुरी, साबुन और उड़द पापड़ का उत्पादन शुरू किया है। जबकि 15 किलोमीटर दूर एक अन्य गांव में जल्द ही गुड़ की चिक्की और लड्डू उत्पादन शुरू होगा।लखपति पुरस्कार से सम्मानित झंखनाबेन की यह कहानी सिर्फ एक महिला की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनते गांवों की पहचान है।Amreli: 

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