हरियाणा में चावल निर्यातकों पर मध्य पूर्व में संघर्ष का असर, कारोबारियों ने की सरकार से दखल देने की मांग

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Basmati Export : मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का असर अब भारत के बासमती चावल निर्यात पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। युद्ध की स्थिति के कारण प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों पर अस्थिरता और रुकावटें बढ़ गई हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों को अपने शिपमेंट अस्थायी रूप से रोकने पड़ रहे हैं। कई कंटेनर बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं और शिपिंग कंपनियां जोखिम और बीमा प्रीमियम बढ़ने के कारण अतिरिक्त शुल्क वसूल रही हैं। इसका सीधा असर देश भर की चावल मिलों पर पड़ा है, जहां कामकाज की रफ्तार धीमी हो गई है और उत्पादन घटाना पड़ा है।Basmati Export  Basmati Export 

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भारत विश्व का सबसे बड़ा बासमती चावल निर्यातक है और पश्चिम एशिया के कई देश इसके प्रमुख खरीदार हैं। खासतौर पर ईरान भारतीय बासमती चावल के सबसे बड़े आयातकों में गिना जाता है। ईरान के साथ व्यापार में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर भारतीय निर्यात पर पड़ता है। हरियाणा, जो देश के कुल बासमती चावल निर्यात में आधे से अधिक योगदान देता है, इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। राज्य के कई निर्यातकों का कहना है कि बंदरगाहों पर अटके कंटेनरों पर युद्धकालीन अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा है, जिससे लागत बढ़ गई है और भुगतान चक्र भी प्रभावित हुआ है।

निर्यातकों के अनुसार, पहले ही बढ़ी हुई लॉजिस्टिक लागत, देरी और भुगतान में अनिश्चितता के कारण उद्योग वित्तीय दबाव में है। अब अतिरिक्त शुल्क और शिपमेंट में रुकावट ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। कई छोटे और मध्यम निर्यातक नकदी प्रवाह की समस्या का सामना कर रहे हैं। चावल मिल मालिकों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो किसानों पर भी इसका असर पड़ सकता है, क्योंकि निर्यात घटने से खरीद प्रभावित होगी।

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हालांकि उद्योग को उम्मीद है कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम होते ही व्यापारिक गतिविधियां सामान्य होने लगेंगी और निर्यात फिर से पटरी पर आ जाएगा। लेकिन फिलहाल अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, जिससे बासमती चावल उद्योग, किसान और निर्यातक सभी चिंतित हैं। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय हालात और सरकारी कदम इस उद्योग की दिशा तय करेंगे।Basmati Export  Basmati Export  Basmati Export  Basmati Export Basmati Export 

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