केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइड ड्यूटी उत्पाद शुल्क 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया है और डीजल पर उत्पाद शुल्क 10 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया है। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी जंग में ऊर्जा संकट को देखते हुए मोदी सरकार का ये बड़ा कदम है जिससे आम नागरिकों राहत मिलेगी। ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की आधी आपूर्ति बाधित हुई है, लेकिन देश ने अगले 60 दिन के लिए अन्य स्रोतों से पर्याप्त कच्चे तेल की आपूर्ति सुरक्षित कर ली है।
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इस कदम का असर सीधे तौर पर ईंधन की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे तेल कंपनियों और लोगों की जेब पर पड़ने वाला बोझ कम होगा । सबसे पहला और महत्वपूर्ण लाभ यह है कि पेट्रोल और डीजल सस्ते हो सकते हैं, अगर तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाती हैं ।
एक्साइज ड्यूटी कम होने का एक नकारात्मक पहलू यह है कि सरकार के राजस्व में कमी हो सकती है।
इसमें सरकार की आय घटती है, जिससे विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं के लिए उपलब्ध संसाधनों पर असर पड़ सकता है । इसलिए सरकार को इस संतुलन को बनाए रखना होता है कि जनता को राहत भी मिले और राजस्व पर अत्यधिक दबाव भी न पड़े । पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कमी एक सकारात्मक कदम है, जो आम नागरिकों, किसानों, व्यापारियों और पूरे देश की अर्थव्यवस्था को राहत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
