Delhi: भारत मंडपम में चल रहे एआई शिखर सम्मेलन में भारतीय सेना ने एआई पर आधारित कई तकनीकों का प्रदर्शन किया, जिससे ये साफ तौर पर जाहिर हो गया कि सैन्य स्तर पर विकसित प्रणालियों को आम नागरिकों के हित के लिए भी कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है। प्रदर्शित प्रमुख नवाचारों में से एक एआई-संचालित दुर्घटना निवारण प्रणाली थी, जिसे वास्तविक समय में ड्राइवरों में थकान और नींद के लक्षणों की निगरानी करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
सेना का दावा है कि यह प्रणाली व्यवहार संबंधी संकेतकों का विश्लेषण करती है और जोखिम कारकों का पता चलने पर तत्काल चेतावनी जारी करती है, जिससे दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलती है। Delhi
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सेना ने एक ऐसी चेहरा पहचान प्रणाली का भी प्रदर्शन किया जो बड़ी भीड़ में व्यक्तियों की पहचान करने और उन पर नज़र रखने में सक्षम है, भले ही व्यक्तियों ने अपनी शक्ल-सूरत बदल ली हो। पूरे प्रदर्शन के दौरान सबसे बेहतर हिमस्खलन, भूस्खलन और बाढ़ के पूर्वानुमान का एक मॉडल था।
दशकों के सैन्य क्षेत्र के आंकड़ों और पर्यावरण एजेंसियों के रिकॉर्ड का इस्तेमाल करके विकसित की गई ये प्रणाली, ऐसी आपदाओं का 72 घंटे पहले तक पूर्वानुमान लगाने के लिए डिज़ाइन की गई है। Delhi
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जैसे-जैसे एआई तकनीक आधुनिक युद्ध और रक्षा क्षेत्र को बदल रही है, भारतीय सेना का यह प्रदर्शन दर्शाता है कि सैन्य नवाचार युद्ध के मैदान से इतर आम जीवन के लिए तकनीकी सहारा बन रही है।
