देशभर में आज होली का त्योहार बेहद उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। लोग घरों से बाहर निकलकर बेहद खुशी के साथ एक-दूसरे को रंग लगा रहे हैं। मंदिरों के नगर और पहाड़ी जिलों से लेकर रेगिस्तानी शहरों और तटीय क्षेत्रों तक होली संगीत और समुदाय की मजबूत भावना के साथ मनाई गई। होली महज अबीर और गुलाल का त्योहार नहीं है बल्कि ये सांस्कृतिक विविधता और समृद्धि को दर्शाने का रंगारंग जरिया है।
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होली के मौके पर कुल्लू के ऐतिहासिक रघुनाथ मंदिर में श्रद्धालु बड़ी संख्या में जुटे और भजन, कीर्तन के साथ-साथ पारंपरिक लोकगीतों के जरिए रंगों के त्योहार को एक-दूसरे के साथ मिलकर मनाया। इस मौके पर कुल्लू के रहने वाले और बाहर से आने वाले लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और आध्यात्मिक उत्साह के साथ पारंपरिक रूप से होली का आनंद लिया। उत्तर प्रदेश के धार्मिक शहर अयोध्या में बाजार के चौक रंगों से सराबोर हो उठे हैं क्योंकि बच्चे और बड़े सभी खुशी से एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगा रहे थे और उत्सव के उमंग को साझा कर रहे थे। राजस्थान का सबसे सुंदर शहर जैसलमेर रंगों के शानदार कैनवास में तब्दील हो गया था क्योंकि यहां के लोग और विदेशी पर्यटक मिलकर होली में रंगों का आनंद ले रहे थे।
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जैसलमेर की सड़कों पर पारंपरिक लोक संगीत की धुनें गूंज रही थी। लोग मस्ती में नाच रहे थे और खुशी-खुशी एक-दूसरे को रंग लगा रहे थे। दक्षिण भारत के कोझिकोड में थाली मंदिर के पास और बैरागी मठ में होली के उत्सव आयोजन किया गया था, जहां मारवाड़ी समुदाय के सदस्य बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए थीं। महिलाएं और बच्चे रंग खेलने के साथ मिठाइयां भी बांट रहे थे, जिससे इस उत्सव का वातावरण और भी आनंदमय हो गया था।
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इसी बीच उत्तरी गुवाहाटी में हजारों लोग होली के मौैके पर डौल गोविंदा मंदिर में डौल उत्सव मनाने के लिए इकट्ठा हुए थे। मंदिर में जुड़े श्रद्धालुओं ने ईश्वर से प्रार्थना की और आशीर्वाद मांगा। हालांकि देश के कई हिस्सों में मंगलवार को होली मनाई गई, लेकिन कुछ क्षेत्रों में चंद्र ग्रहण के कारण और धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक होली का उत्सव चार मार्च को मनाया जाएगा। तिथियों में अंतर होने के बावजूद होली के मौके पर रंग, उत्साह और एकजुटता की भावना पूरे देश में बनी हुई है।
