Holi 2026: आज यानी 2 मार्च को होलिका दहन है! होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा के दिन किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन लोग होलिका की पूजा करते हैं और उसकी अग्नि में नकारात्मकता को जलाते हैं।
होलिका दहन का महत्व
होलिका दहन भगवान विष्णु की भक्ति और शक्ति का प्रतीक है। यह पर्व हमें सत्य और न्याय की जीत की याद दिलाता है। होलिका दहन के दिन लोग अपने घरों को साफ-सुथरा करते हैं और पूजा-पाठ करते हैं। यह पर्व हमें अपने अंदर की बुराइयों को जलाने और अच्छाई की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है। साथ ही होलिका दहन का पर्व सामाजिक एकता और भाईचारे का भी प्रतीक है।
होलिका दहन की पूजा विधि
होलिका दहन के लिए शाम 6:22 बजे से रात 8:50 बजे तक का समय शुभ माना जाता है। पूजा के लिए गुलाल, नारियल, धूप, और फूल की आवश्यकता होती है। होलिका की अग्नि में गेहूं की बालियां, गन्ना, और अन्य सामग्री अर्पित की जाती है। पूजा के दौरान भगवान विष्णु और होलिका की स्तुति की जाती है। होलिका दहन के बाद लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाते हैं और बड़ों के पैर छूते हैं।
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क्यों मनाई जाती है होली?
होली एक हिंदू त्योहार है जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह पर्व भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद की जीत और होलिका के नाश की कहानी पर आधारित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद को उनके पिता हिरण्यकश्यप ने मारने का हर संभव प्रयास किया… क्योंकि वो असुर कुल में जन्म लेने के बावजुद जन्म से ही भगवान विष्णु के भक्त थे। लेकिन हिरण्यकश्यप के प्रयास को भगवान विष्णु ने असफल कर दिया। हिरण्यकश्यप की बहन होलिका ने भी प्रहलाद को मारने की योजना बनाई और उसे अपनी गोद में बैठाकर आग में जलाने की कोशिश की, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद बच गया और होलिका आग में जल गई तभी से लोग बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर होली का त्योहार मनाते हैं।
कैसे मनाई जाती है होली?
होली के दिन सुबह में लोग अपने घरों को साफ-सुथरा करते हैं और पूजा-पाठ करते हैं। होलिका दहन के बाद लोग एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाते हैं। लोग अपने घरों में तरह-तरह के पकवान बनाते हैं और एक-दूसरे के साथ बांटते हैं। होली का पर्व लोगों को एक-दूसरे के करीब लाता है और सामाजिक एकता को बढ़ावा देता है।
