Iran-Israel: ईरान-इज़राइल-अमेरिका युद्ध पर जो पेट्रोलियम और गैस की क़ीमतों में उछाल और भारत में इसके कमी की आशंका जतायी जा रही है।इस पर भारत सरकार ने बड़ा दावा किया है।सरकार ने कहा है कि भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीज़ल के दाम स्थिर ही रहेंगे वह नहीं बढ़ेंगे,वही घरेलू गैस की कोई किल्लत नहीं है। दुनिया भर में ईरान-अमेरिका युद्ध की आग भड़क रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पूरी तरहा बंद होने की आशंका से ग्लोबल ऑयल मार्केट में हड़कंप मचा हुआ है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार जा चुका है, कई जगह गैस और फ्यूल की कीमतें आसमान छू रही हैं। लेकिन भारत में क्या स्थिति है? क्या घरेलू उपभोक्ता को महंगाई का झटका लगेगा? सरकार ने आज बड़ा दावा किया है – पेट्रोल और डीज़ल के दाम फिलहाल स्थिर रहेंगे, कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।
केंद्र सरकार के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, भारत सरकार ने साफ कहा है कि पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें नहीं बढ़ेंगी। गैस कीमतों में जो मामूली उछाल देखा गया, वो भी नियंत्रित है। सरकार का फोकस घरेलू उपभोक्ता पर है। पहले होर्मुज़ ज़ोन से 60% डीज़ल-पेट्रोल सप्लाई आती थी अब इसे बढ़ाकर 65% किया गया है और वर्तमान में 70% तक पहुंच गया है। यानी सरकार ने सप्लाई चेन को मजबूत किया है। मिडिल ईस्ट से आने वाली सप्लाई में रुकावट के बावजूद, वैकल्पिक देशों से बातचीत शुरू हो चुकी है। वेस्ट अफ्रीका और अन्य स्रोतों से अब पेट्रोलियम और गैस की आपूर्ति बढ़ रही है।
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सूत्र बताते हैं कि पहले मिडिल ईस्ट से करीब 40% ग्रोथ वाली सप्लाई आती थी, लेकिन युद्ध के कारण स्थिति बदली है। अब वैकल्पिक देशों से निरंतर वार्ता चल रही है और सप्लाई शुरू हो गई है। देश में एक भी गैस डिस्ट्रीब्यूटर ड्राई नहीं हर डिस्ट्रीब्यूटर के पास जनता की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक है।पेट्रोल-डीज़ल की स्टोरेज कैपेसिटी: 70 दिन है वही सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी है। पूरी सप्लाई चेन इसी तरह मेंटेन की जा रही है ताकि घरों में गैस और फ्यूल की कोई कमी न हो। कालाबाज़ारी रोकने के लिए भी पुख्ता मैकेनिज्म तैयार किया गया है। लोगों की दिक्कतें दूर करने के लिए सरकार ने तीन सदस्यों की एक स्पेशल कमेटी बनाई है। इस कमेटी को जनता का फीडबैक आना शुरू हो चुका है और रोज़ाना के आधार पर रणनीति बनाई जा रही है। वैश्विक संकट के बीच भारत सरकार की ये तैयारी और दावा फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है पर युद्ध लंबा खींचने पर चुनौती बढ़ सकती है।
