चैत्र नवरात्रि में पूरे नौ दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की उपासना की जाती है। नवरात्रि में अष्टमी-नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है। अष्टमी के दिन मां महागौरी व नवमी के दिन सिद्धिदात्री मां की उपासना की जाती है। अष्टमी व नवमी दोनों दिन कन्या पूजन करना विशेष फलदायी माना गया है। कन्या पूजन के बाद ही भक्तों के नवरात्रि व्रत संपन्न माने जाते हैं।
कन्या पूजन
कन्या भोजन से पहले कन्याओं को आमंत्रित कर उनका स्वागत करें, उनके पैर धोएं, उनका श्रृंगार करें और उसके बाद उन्हें भोजन करवाएं। भोजन में मिष्ठान और फल शामिल करना न भूलें। इसके बाद उन्हें यथायोग्य उपहार देकर उनके घर तक पहुंचाएं। किसी भी वर्ण, जाति और धर्म की कन्या को आप कन्या पूजन के लिए आमंत्रित कर सकती हैं। अष्टमी तिथि 09 अप्रैल, शनिवार के दिन पड़ रही है। इसे दुर्गा अष्टमी भी कहते हैं। कुछ लोग नवमी के दिन भी कन्या पूजन करते हैं। नवमी के दिन सुबह के समय कन्या पूजन कर सकते हैं।
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