Lok Sabha: लोकसभा में ओम बिरला को अध्यक्ष पद से हटाने के प्रस्ताव पर आज सदन में जोरदार बहस हुई है।इस बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक-दूसरे पर तीखे हमले किए है। लोकसभा में आज स्पीकर ओम बिरला पर पक्षपातपूर्ण आचरण का आरोप लगाते हुए प्रस्ताव पेश किया गया। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद और अन्य ने यह प्रस्ताव लोकसभा में पेश किया।
पीठासीन स्पीकर जगदंबिका पाल ने प्रस्ताव को सदन में बहस के लिए स्वीकार कर लिया।इसके बाद 10 घंटे की चर्चा शुरू हो गयी। बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने की, गोगोई ने आरोप लगाया कि स्पीकर ने संविधान और सदन की गरिमा को बचाने के लिए यह कदम जरूरी है। उन्होंने राहुल गांधी को बोलने नहीं देने, विपक्षी सांसदों पर निलंबन और महिलाओं पर आरोपों जैसे मुद्दों का जिक्र किया। अन्य विपक्षी नेता जैसे के.सी. वेणुगोपाल, असदुद्दीन ओवैसी और सौगत रॉय ने भी पक्षपात का आरोप लगाया।
बहस में हिस्सा लेते हुए प्रियंका गांधी ने भी नेता विपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व की भरपूर तारीफ की। प्रियंका गांधी ने दौरान सरकार पर बड़े आरोप लगाए। वही बहस में सत्ता पक्ष का भी जोरदार पलटवार हुआ। सत्तापक्ष बीजेपी और NDA के सांसदों ने प्रस्ताव को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया और स्पीकर की निष्पक्षता का बचाव किया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बहस में हिस्सा लिया और कहा कि विपक्ष सदन में अपनी जवाबदेही से बचने के लिए प्रस्ताव लाया है, जिसका कोई औचित्य नहीं है।
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वही गृहमंत्री अमित शाह ने भी बहस के दौरान विपक्ष को जोरदार जवाब दिया, गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तंज कसा कि केवल विरोध के लिए ऐसा कोई विपक्ष पहले नहीं देखा गया। बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद, और अन्य सांसदों ने भी स्पीकर के पक्ष में बोलते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया। लोकसभा अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 94(c) के तहत होती है। प्रस्ताव को सदन के कुल सदस्यों के बहुमत से पास होना जरूरी है जो विपक्ष के पास नही है। वही इस बहस में डिप्टी स्पीकर की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठे है, क्योंकि संवैधानिक प्रक्रिया में यह भूमिका महत्वपूर्ण है।
